नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के प्रस्तावित विदेश दौरे को लेकर एक नया दावा किया है। रमेश ने कहा कि कुछ IIT निदेशकों से अपने संस्थानों के पूर्व छात्रों से संपर्क करने के लिए कहा गया है, ताकि वे अमेरिका यात्रा के दौरान भागवत से बातचीत कर सकें।कांग्रेस नेता ने इस कथित पहल को लेकर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह अनुचित बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए IIT निदेशकों की भूमिका पर आपत्ति जताई और पूछा कि संस्थानों के प्रमुखों को इस तरह के संपर्क के लिए क्यों कहा जा रहा है।
IIT निदेशकों को लेकर क्या दावा किया जयराम रमेश ने
जयराम रमेश के अनुसार कई IIT निदेशकों को अपने पूर्व छात्रों से संपर्क करने के लिए कहा गया है। इन पूर्व छात्रों की संभावित बातचीत RSS प्रमुख के साथ कराने की बात कही जा रही है।
रमेश ने चुने हुए संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों के साथ ऐसे संवाद और RSS प्रमुख के साथ संवाद के बीच अंतर बताया। उनका तर्क है कि पूर्व छात्रों से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मंत्री या सांसदों के साथ संवाद कराने की पहल अलग बात है, लेकिन किसी राजनीतिक या सामाजिक संगठन के प्रमुख के साथ ऐसी भूमिका पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर जा सकते हैं भागवत
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मोहन भागवत 25 अगस्त से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन की यात्रा पर जा सकते हैं। यह दौरा भारतीय समुदाय से जुड़े स्थानीय संगठनों और संघों के निमंत्रण पर प्रस्तावित बताया जा रहा है।RSS के अनुसार यह यात्रा संगठन के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के बीच हो रही है। दौरे के दौरान भागवत भारतीय समुदाय के लोगों और स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से संवाद कर सकते हैं। यात्रा के विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी बाद में सामने आने की उम्मीद है।
RSS के शताब्दी वर्ष के बीच हो रहा विदेशी दौरा
भागवत का यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के आयोजनों के दौरान हो रहा है। इस दौरान भारतीय संस्कृति, समाज, संगठन की गतिविधियों और प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़े विषयों पर संवाद होने की संभावना है।RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर पहले ही भागवत की अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा की जानकारी साझा कर चुके हैं।
Gen Z को लेकर भागवत ने क्या कहा था, विरोध और लोकतंत्र पर भी रखी राय
इससे पहले मुंबई में IIMUN के 15 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने लोकतंत्र में नई पीढ़ी की भूमिका पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि Gen Z और Gen Alpha सवाल पूछने वाली पीढ़ियां हैं और वे तर्क के आधार पर जवाब चाहती हैं।
भागवत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा था कि प्रदर्शन का उद्देश्य केवल किसी व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की दिशा में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि युवा प्रदर्शनकारियों को तुरंत देश विरोधी नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि वे देश की अगली पीढ़ी हैं।उन्होंने नई पीढ़ी को मौजूदा पीढ़ी की तुलना में अधिक ईमानदार बताते हुए कहा था कि देशभक्ति और सेवा की वास्तविक अपील का उन पर असर हो सकता है।
अब नजर भागवत के दौरे और कांग्रेस के आरोपों पर
भागवत के प्रस्तावित विदेश दौरे को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत हैं। जयराम रमेश के दावे ने IIT संस्थानों की भूमिका और RSS प्रमुख के साथ संभावित संवाद को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल IIT की ओर से इस दावे पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया और तेज हो सकती है।

