मुरैना : ग्राम पंचायत इमलिया में मनरेगा और वित्त आयोग से कराए गए विकास कार्यों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों में गड़बड़ी की शिकायत जिला कलेक्टर से की है। शिकायत में विकास कार्यों, मजदूरी भुगतान और पंचायत के रिकॉर्ड की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता अमर सिंह राठौर ने आरोप लगाया है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान पंचायत को अलग-अलग विकास कार्यों के लिए मिली सरकारी राशि के इस्तेमाल में अनियमितता की गई। शिकायत में सरपंच सहित संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी राशि निकालने के आरोप लगाए गए हैं।
मृत लोगों के नाम से मजदूरी भुगतान का आरोप
शिकायत में सबसे गंभीर आरोप ऐसे लोगों के नाम पर मजदूरी राशि निकाले जाने का है, जिनकी कई वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है।ग्रामीणों के मुताबिक दिलीप पिता मोतीराम की करीब 15 वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद पंचायत के रिकॉर्ड में उनका नाम मौजूद बताया गया है और उनके नाम से मजदूरी राशि निकाले जाने का आरोप लगाया गया है।
इसी तरह गुड्डी उर्फ लक्ष्मी पत्नी ठकुरी सिंह को लेकर भी शिकायत में दावा किया गया है कि उनकी मृत्यु करीब 15 वर्ष पहले हो चुकी है। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उन्हें जीवित दर्शाकर उनके नाम से कथित रूप से भुगतान किया गया।
जॉब कार्ड और सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ी का दावा
ग्रामीणों ने पंचायत के दस्तावेजों में भी कथित हेरफेर किए जाने का आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक मृत्यु प्रमाण पत्र, जॉब कार्ड और अन्य रिकॉर्ड में बदलाव या गलत जानकारी दर्ज किए जाने की आशंका जताई गई है।इसके अलावा कुछ विकास कार्यों को सरकारी दस्तावेजों में पूरा दिखाने का आरोप भी लगाया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि जिन कार्यों को कागजों में पूर्ण बताया गया है, उनमें से कुछ मौके पर अधूरे हैं या फिर उनका वास्तविक अस्तित्व ही नहीं दिखाई देता।
मस्टर रोल से वित्तीय रिकॉर्ड तक जांच की मांग
ग्रामीणों ने पंचनामा तैयार कर जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। उन्होंने पंचायत में हुए सभी विकास कार्यों की मौके पर जांच कराने के साथ मनरेगा भुगतान, जॉब कार्ड, मस्टर रोल और वित्तीय दस्तावेजों की भी विस्तृत जांच की मांग की है।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह हुआ।अब इस मामले में जिला प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजर है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

