Gandhi Handwritten Notes: महात्मा गांधी के विचारों से जुड़ा एक दुर्लभ हस्तलिखित संग्रह नीलामी में रिकॉर्ड कीमत पर बिका है। सत्य, अहिंसा, सेवा और नैतिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर गांधीजी द्वारा लिखे गए 688 विचारों की पांडुलिपि को 16.20 करोड़ रुपये की बोली मिली। यह किसी भारतीय ऐतिहासिक दस्तावेज के लिए विश्व रिकॉर्ड बताया जा रहा है।इस ऐतिहासिक संग्रह को सैफ्रनआर्ट की नीलामी में पेश किया गया था। खास बात यह है कि खरीदार भारत का है और पांडुलिपि देश में ही रहेगी। हालांकि खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
दो साल तक लिखे गए थे गांधीजी के संदेश
यह संग्रह गांधीजी और उनके करीबी सहयोगी तथा स्वतंत्रता सेनानी आनंद टी. हिंगोरानी के निजी संबंधों से जुड़ा है। हिंगोरानी की पत्नी विद्या के निधन के बाद करीब दो वर्षों तक गांधीजी ने उन्हें नियमित रूप से हस्तलिखित संदेश भेजे।इन संदेशों में केवल सांत्वना ही नहीं, बल्कि जीवन, आत्मअनुशासन और नैतिक मूल्यों को लेकर गांधीजी के विचार भी शामिल थे। बाद में इन्हीं संदेशों को ‘A Thought for the Day’ नामक पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया गया।
गांधीजी के निजी विचारों की मिलती है झलक
पांडुलिपि में गांधीजी के दर्शन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय दिखाई देते हैं। इनमें सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह, निर्भयता, धार्मिक समानता, अस्पृश्यता निवारण, प्रार्थना, सेवा, श्रम और स्वराज जैसे विचार शामिल हैं।इसके अलावा नैतिक जिम्मेदारी, मौन, अंतरात्मा की आवाज, अनासक्ति और आत्मसाक्षात्कार जैसे विषयों पर भी गांधीजी ने अपने विचार दर्ज किए थे।
86 लॉट में शामिल था पूरा संग्रह
सैफ्रनआर्ट की ‘गांधी: फ्रॉम द कलेक्शन ऑफ आनंद टी. हिंगोरानी’ नाम से हुई नीलामी में कुल 86 लॉट रखे गए थे। इसमें गांधीजी के पत्र, पांडुलिपियां, तस्वीरें और उनसे जुड़ी निजी वस्तुएं शामिल थीं।यह संग्रह गांधीजी की सार्वजनिक राजनीतिक भूमिका के साथ उनके निजी व्यक्तित्व को भी सामने लाता है। दस्तावेजों से पता चलता है कि वे अपने करीबी लोगों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर किस तरह संवाद करते थे और उन्हें जीवन से जुड़ी सलाह देते थे।
चरखा और ईश्वर से जुड़े दस्तावेज भी करोड़ों में बिके
नीलामी में गांधीजी से जुड़ी अन्य दुर्लभ वस्तुओं को भी शानदार कीमत मिली। ईश्वर और भगवद गीता पर गांधीजी के विचारों से जुड़ी तीन पांडुलिपियों और पत्रों का संग्रह 1.68 करोड़ रुपये में बिका।गांधीजी का पेटी चरखा 1.02 करोड़ रुपये में नीलाम हुआ। इसके साथ सूत कातने के आध्यात्मिक अनुशासन पर लिखे गए दो पत्र भी शामिल थे। इसका अनुमानित मूल्य 50 से 70 लाख रुपये रखा गया था।
हस्ताक्षर वाली तस्वीर और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़े पत्र भी बिके
गांधीजी की लिखते हुए एक हस्ताक्षरित तस्वीर के लिए 78 लाख रुपये की बोली लगी। वहीं आर्थिक स्वतंत्रता से संबंधित उनके पत्र, टेलीग्राम और पोस्टकार्ड का संग्रह 57.60 लाख रुपये में बिका।
हिंगोरानी परिवार ने पीढ़ियों तक संभालकर रखा था संग्रह
आनंद टी. हिंगोरानी का परिवार इस पूरे संग्रह को कई पीढ़ियों से सुरक्षित रखता आया है। गांधीजी और हिंगोरानी के बीच दो दशक से अधिक समय तक संबंध रहे।पत्रों, तस्वीरों और निजी वस्तुओं के इस संग्रह में स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी ऐतिहासिक झलकियों के साथ दोनों के बीच का व्यक्तिगत संवाद भी दर्ज है। यही वजह है कि 16.20 करोड़ रुपये में बिकी यह पांडुलिपि केवल एक महंगी ऐतिहासिक वस्तु नहीं, बल्कि गांधीजी के निजी चिंतन और उनके जीवन मूल्यों को समझने वाला दुर्लभ दस्तावेज भी मानी जा रही है।

