लखनऊ। उत्तर प्रदेश और जापान के यामानाशी प्रान्त के बीच संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण पहल हुई। उत्तर प्रदेश विधानसभा और यामानाशी प्रान्त की विधानसभा ने आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन यानी MoU पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के जरिए दोनों क्षेत्रों के बीच संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देने की तैयारी है।
दोनों विधानसभा अध्यक्षों ने किए MoU पर हस्ताक्षर
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और यामानाशी प्रान्त विधानसभा के अध्यक्ष हिदेनोरी मियामोटो ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जापानी प्रतिनिधिमंडल का विधानसभा परिसर में स्वागत किया गया और उन्हें सदन की कार्यप्रणाली, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा विधानसभा के ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया गया। सतीश महाना ने प्रतिनिधिमंडल को स्मृति-चिह्न भी भेंट किया।
आपसी दौरे और अनुभव साझा करने पर रहेगा जोर
समझौते के तहत दोनों विधानसभाएं प्रतिनिधिमंडलों के आपसी दौरे, सूचनाओं के आदान-प्रदान और विभिन्न सहयोगी गतिविधियों को प्रोत्साहित करेंगी। विधायी प्रक्रियाओं, कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अनुभवों को साझा करने के साथ जनप्रतिनिधियों के बीच सीधा संवाद बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहेगा।
पर्यटन से शिक्षा तक कई क्षेत्रों में बनेंगे सहयोग के अवसर
MoU के माध्यम से अर्थव्यवस्था, पर्यटन, कृषि, शिक्षा और मानव संसाधन विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने का रास्ता खुलेगा। तकनीक, ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान को भी इस साझेदारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भविष्य में जरूरत के अनुसार अन्य क्षेत्रों में संयुक्त पहल की संभावना भी रखी गई है।
काशी और बौद्ध सर्किट से जापानी प्रतिनिधिमंडल को कराया गया परिचित
बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत पर भी चर्चा हुई। जापानी प्रतिनिधिमंडल को काशी के ऐतिहासिक महत्व और प्रदेश के बौद्ध सर्किट के बारे में जानकारी दी गई। माना जा रहा है कि इससे दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के स्तर पर आपसी जुड़ाव को भी नई गति मिल सकती है।
भारत-जापान संबंधों को राज्य स्तर पर मिलेगी नई मजबूती
सतीश महाना ने प्रतिनिधिमंडल के सामने उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा और राज्य में मौजूद सहयोग व निवेश की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। विधानसभा स्तर पर हुआ यह समझौता भारत और जापान के बीच आर्थिक, औद्योगिक, तकनीकी, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को राज्य व प्रान्त स्तर पर और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

