मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट की पहचान बाघों की बड़ी आबादी के कारण मिली है, लेकिन अब बाघों की मौतों का बढ़ता आंकड़ा वन विभाग के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2025 में प्रदेश के टाइगर रिजर्व और अलग-अलग वनमंडलों में कुल 55 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें आपसी संघर्ष, करंट, शिकार, बीमारी, दुर्घटना और अन्य कारण शामिल रहे।राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी NTCA ने वन विभाग से पिछले साल हुई बाघों की मौत का विस्तृत ब्यौरा मांगा था। इसके बाद विभाग ने मौत की जगह, परिस्थितियों और संभावित कारणों की जानकारी के साथ रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट में सामने आया कि सबसे ज्यादा 11 बाघ कान्हा टाइगर रिजर्व में मरे। इसके बाद बांधवगढ़ और पेंच में 9-9 मौतें दर्ज की गईं।
कान्हा और बांधवगढ़ में आपसी संघर्ष बड़ी वजह
कान्हा टाइगर रिजर्व में दर्ज 11 मौतों में कई मामले बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई से जुड़े बताए गए हैं। इसके अलावा शिकार और विद्युत करंट जैसे मामले भी सामने आए।बांधवगढ़ में 9 बाघों की मौत हुई। यहां क्षेत्रीय संघर्ष के साथ करंट, संक्रमण, शिकार से जुड़े मामले और कुछ अज्ञात कारण भी सामने आए। रिपोर्ट में खाल और अंगों की जब्ती से जुड़े मामलों का भी उल्लेख है।
पेंच में बीमारी से लेकर डूबने तक के मामले
पेंच टाइगर रिजर्व में भी 9 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें करंट से शिकार का एक मामला सामने आया, जबकि अन्य मौतों के पीछे प्राकृतिक कारण, बीमारी, डूबना, आपसी संघर्ष और अज्ञात वजहें बताई गईं।एक मामले में प्राकृतिक रूप से मृत बाघ के अंग काटे जाने की जानकारी भी सामने आई। इससे वन्यजीवों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होते हैं।
संजय रिजर्व समेत कई वन क्षेत्रों में भी मौतें
संजय टाइगर रिजर्व में 5 बाघों की मौत दर्ज हुई। इनमें करंट से शिकार, आपसी संघर्ष और अज्ञात कारणों से हुई मौतें शामिल हैं।टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों की मौत का सिलसिला जारी रहा। दक्षिण बालाघाट और उमरिया वनमंडल में 3-3 मौतें दर्ज की गईं। दक्षिण बालाघाट में करंट, फंदे और शिकार से जुड़े मामले सामने आए, जबकि उमरिया में करंट और आपसी संघर्ष को मौत की वजह बताया गया।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 2 बाघों की मौत हुई। इनमें एक मामला प्राकृतिक मौत का और दूसरा आपसी संघर्ष का था। औबेदुल्लागंज वनमंडल में बीमारी और ट्रेन की चपेट में आने से 2 बाघों की जान गई।इसके अलावा उत्तर बालाघाट में खाल और अंग जब्ती से जुड़े दो मामले सामने आए। बुरहानपुर, बैतूल, सागर, सिवनी, सिंगरौली, मंडला, सीहोर, पन्ना और सतना समेत कई वनमंडलों में भी एक-एक बाघ की मौत दर्ज की गई।
करंट, शिकार और हादसे बने संरक्षण के लिए चुनौती
रिपोर्ट से यह साफ होता है कि बाघों की मौत केवल प्राकृतिक कारणों तक सीमित नहीं है। विद्युत करंट, अवैध शिकार, आपसी संघर्ष और ट्रेन या वाहन की चपेट में आने जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आ रही हैं।ऐसे में बाघों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके सुरक्षित आवास, वन्यजीव कॉरिडोर, विद्युत लाइनों की निगरानी और शिकार विरोधी अभियान को मजबूत करना जरूरी हो गया है।
2025 में देश में 166, MP में 55 बाघों की मौत
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में देशभर में 166 बाघों की मौत दर्ज हुई। इनमें मध्य प्रदेश के 55 बाघ शामिल रहे। प्रदेश के लिए यह आंकड़ा विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि बाघ संरक्षण के मामले में मध्य प्रदेश देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।बाघों की लगातार हो रही मौतों को लेकर संरक्षण व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। हाल में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वन्यजीव संरक्षण, विभागीय संसाधनों और फंड के उपयोग से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर रुख अपनाया है।

