लखनऊ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR जैसे व्यापक अभियान को सफल बनाने के लिए चुनाव आयोग की दृढ़ता के साथ मतदाताओं का सहयोग भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत में इस प्रक्रिया को जिस स्तर पर सहयोग मिला है, उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चुनाव व्यवस्था की विश्वसनीयता को मजबूत किया है।
ज्ञानेश कुमार लखनऊ में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से आयोजित इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब्स ELC 2.0 और ECINET पर दूसरी क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।
SIR के लिए आयोग और मतदाताओं दोनों की भूमिका अहम
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य केवल चुनाव आयोग के प्रयास से पूरे नहीं हो सकते। इसके लिए मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी और सहयोग भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भारत में मतदाताओं से मिले व्यापक सहयोग ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को दूसरे देशों के लिए भी उदाहरण बनाया है। उनके अनुसार, कई देश भारत की चुनाव प्रक्रिया को देखते हैं, उससे सीखने की कोशिश करते हैं और अपने यहां भी ऐसी व्यवस्था अपनाने की इच्छा रखते हैं।
युवाओं को चुनावी व्यवस्था की जानकारी देने पर जोर
उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों से आए विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को संबोधित करते हुए ज्ञानेश कुमार ने इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं को चुनावी प्रक्रिया की जानकारी देना लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम है।
उन्होंने विद्यार्थियों और नए मतदाताओं को मतदाता पंजीकरण, मतदान, मतगणना, चुनावी प्रक्रिया और भारत निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारियों से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पारदर्शिता को लेकर चुनाव आयोग का दावा
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देश में चुनाव संविधान, कानून और भारत निर्वाचन आयोग के निर्धारित निर्देशों के तहत कराए जाते हैं। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के सभी चरणों में राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी को पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने चुनाव व्यवस्था को पारदर्शी बताते हुए लखनऊ और उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को जागरूक भी बताया।
लखनऊ से अपने पुराने संबंध को किया याद
लखनऊ दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने शहर से अपने पुराने जुड़ाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा के लिए IIT जाने से पहले उनकी पढ़ाई लखनऊ में हुई थी। लंबे अंतराल के बाद शहर लौटने पर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं तक चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा संदेश पहुंचाने की बात कही।
युवा मतदाताओं को लोकतंत्र से जोड़ना भविष्य में निवेश
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि युवाओं का चुनावी व्यवस्था में विश्वास और उनकी जानकारी के साथ सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि नई पीढ़ी को चुनाव प्रक्रिया की बेहतर समझ देना केवल मतदान तक सीमित विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास मजबूत करने का माध्यम भी है।

