मध्यप्रदेश में सरकारी धन के भुगतान से जुड़ी व्यवस्था में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। राज्य वित्तीय आसूचना प्रकोष्ठ यानी SFIC ने कोषालय के सॉफ्टवेयर में दर्ज लेनदेन का विश्लेषण किया तो करीब 648 करोड़ रुपये की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां चिन्हित हुईं। इस जांच की जद में 24 विभागों और उनकी इकाइयों से जुड़े 187 आहरण एवं संवितरण अधिकारियों यानी DDO को लिया गया है।
मामला सामने आने के बाद सरकार ने जांच और वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक करीब 56 करोड़ रुपये की गबन राशि वापस कराई जा चुकी है, जबकि अनियमित ट्रांसफर से जुड़ी लगभग 164 करोड़ रुपये की रकम भी रिकवर की गई है।
कहां-कहां सामने आई वित्तीय गड़बड़ी
SFIC के डेटा विश्लेषण में करीब 349 करोड़ रुपये के अनियमित ट्रांसफर का पता चला है। इसके अलावा लगभग 299 करोड़ रुपये के ऐसे भुगतान चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें संदिग्ध, कपटपूर्ण, दोहरे या अधिक भुगतान की श्रेणी में रखा गया है।
इससे संकेत मिलता है कि मामला केवल एक विभाग या कुछ चुनिंदा लेनदेन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भुगतान व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर इसकी जांच की जा रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग सबसे आगे
विभागवार जांच में स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े सबसे ज्यादा 45 DDO जांच के दायरे में आए हैं। राजस्व विभाग के 43, जनजातीय कार्य विभाग के 26 और पुलिस विभाग के 12 DDO की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि सरकारी धन के भुगतान में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और किन लोगों की भूमिका इसमें रही।
कैबिनेट में उठा मामला, मुख्यमंत्री ने दिए सख्त निर्देश
यह पूरा मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भी सामने आया। वित्त विभाग की ओर से SFIC की कार्रवाई और अब तक की जांच की जानकारी दी गई।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जांच में तेजी लाने के साथ-साथ उन लोगों से रकम की वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिनके खातों में कथित तौर पर सरकारी राशि पहुंची। यदि किसी संबंधित अधिकारी के सेवानिवृत्त होने की स्थिति सामने आती है, तो उसकी पेंशन से भी नियमानुसार वसूली किए जाने की बात कही गई है।
राकेश सिंह ने बताया, अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू
कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह ने भी मामले को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट में इस विषय पर चर्चा हुई है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और नोटिस भी जारी किए गए हैं।
सरकार की प्राथमिकता अब यह पता लगाने की है कि संदिग्ध भुगतान की रकम किन खातों में गई और सरकारी खजाने को हुए नुकसान की पूरी भरपाई किस तरह की जाएगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
RTI एक्टिविस्ट ने भी मांगी गहन जांच
RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे ने भी मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका जोर इस बात पर है कि सरकारी धन किन अधिकारियों या अन्य खातों में पहुंचा, इसकी पूरी जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल रकम के अंतिम ठिकाने पर
648 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आंकड़े सामने आने के बाद अब जांच का सबसे अहम पहलू यह है कि इस रकम का वास्तविक लाभ किसे मिला। सरकार ने वसूली और कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं, लेकिन SFIC की जांच आगे बढ़ने पर भुगतान की पूरी श्रृंखला और जिम्मेदार लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद है।

