सोने की कीमतों ने तोड़ा रिकॉर्ड
वैश्विक बाजार में सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। भारत में भी 10 ग्राम सोना ₹70,000 के पार जा चुका है। निवेशकों में जहां इसे लेकर उत्साह है, वहीं अर्थशास्त्रियों ने संभावित बुलबुले (Gold Bubble) की चेतावनी दी है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की मौजूदा कीमतें वास्तविक मांग से ज्यादा “आर्थिक अस्थिरता और अनिश्चितता” के कारण बढ़ रही हैं।
क्या है अर्थशास्त्री की चेतावनी
प्रमुख अर्थशास्त्री नौरीन शर्मा का कहना है, “जब भी वैश्विक स्तर पर आर्थिक डर बढ़ता है, निवेशक सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन अगर यह बढ़त डर पर आधारित है, न कि वास्तविक मांग पर — तो यह बुलबुले में बदल सकती है।” उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले महीनों में अगर वैश्विक बाजार स्थिर हुआ, तो सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी जा सकती है।
बुलबुला या संकट का बीमा?
कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, सोना एक “संकट का बीमा” है, यानी जब बाजार या करेंसी पर भरोसा घटता है तो निवेशक सोने की ओर भागते हैं। वहीं अन्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा स्थिति में सोने की खरीद एक भावनात्मक निर्णय बन गई है, जो लंबे समय में नुकसान भी पहुंचा सकती है। निवेशकों को क्या करना चाहिए एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशक फिलहाल सोने में छोटे और संतुलित निवेश करें। लॉन्ग-टर्म पोर्टफोलियो में गोल्ड को एक हिस्से तक सीमित रखें और पूरी रकम इस दिशा में न लगाएं।