दिल्ली में शेयर बाजार में निवेश कर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा देकर 20.72 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने मामले में एक निजी बैंक के डिप्टी मैनेजर सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 36 वर्षीय कन्हैया दास, 28 वर्षीय राहुल टेलर और 35 वर्षीय आरिफ हुसैन मंसूरी के रूप में हुई है। मंसूरी एक निजी बैंक में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत था।
ज्यादा रिटर्न का लालच देकर फंसाया शिकार
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगों ने पीड़ित को शेयर बाजार में निवेश के बदले ज्यादा और बेहतर रिटर्न मिलने का भरोसा दिलाया। मुनाफे के लालच में पीड़ित ने रकम निवेश कर दी, लेकिन बाद में उसके साथ 20.72 लाख रुपये की धोखाधड़ी हो गई।पीड़ित की ऑनलाइन शिकायत मिलने के बाद नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर पुलिस स्टेशन ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
मनी ट्रेल से खुलती गई ठगी की परतें
मामले की गंभीरता और साइबर अपराध के तकनीकी पहलुओं को देखते हुए पुलिस ने विशेष टीम बनाई। टीम ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, तकनीकी गतिविधियों, लोकेशन और लाभार्थी खातों की गहन जांच की।जांच के दौरान पुलिस ने ठगी की रकम के पूरे लेनदेन की कड़ी को खंगाला। इसी मनी ट्रेल से पता चला कि धोखाधड़ी से हासिल रकम एक बैंक खाते में पहुंचाई गई और बाद में चेक के जरिए नकद निकाली गई।तकनीकी निगरानी और लेनदेन के पैटर्न का विश्लेषण करने के बाद पुलिस टीम आरोपियों के राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित मावली इलाके तक पहुंची।
एक ने दिया बैंक खाता, दूसरे ने निकाली नकदी
पुलिस जांच में सामने आया कि कन्हैया दास का बैंक खाता ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। कन्हैया टैक्सी चालक के तौर पर काम करता था।वहीं राहुल टेलर मनी ट्रांसफर से जुड़े कारोबार में था। उस पर सेल्फ चेक के जरिए रकम निकालने और पैसे के ट्रांसफर में भूमिका निभाने का आरोप है।पुलिस के मुताबिक, जिस बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया, वह मामले में सेकंड लेयर अकाउंट के तौर पर काम कर रहा था। इस खाते के जरिए करीब दो लाख रुपये की रकम ट्रांसफर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
2 प्रतिशत कमीशन के बदले मदद करने का आरोप
जांच के दौरान डिजिटल सबूतों और बरामद मोबाइल फोन की जांच से पुलिस को निजी बैंक के डिप्टी मैनेजर आरिफ हुसैन मंसूरी की कथित संलिप्तता के संकेत मिले।पुलिस के अनुसार, राहुल टेलर अपने मनी ट्रांसफर कारोबार के दौरान मंसूरी के संपर्क में आया था। इसके बाद बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े काम में मदद लेने के लिए उससे संपर्क किया गया।आरोप है कि मंसूरी ने बैंक खाते के इंतजाम में सहयोग किया और इसके बदले उसे 2 प्रतिशत कमीशन मिला। पुलिस के अनुसार, वह अप्रैल 2024 से संबंधित बैंक शाखा में कार्यरत था। डिजिटल साक्ष्य मिलने के बाद उसे भी मावली से गिरफ्तार कर लिया गया।
चार मोबाइल फोन जब्त, जांच जारी
पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के साथ वारदात में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इन डिजिटल उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस अब ठगी से जुड़े अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए अन्य लोगों को भी निशाना बनाया गया या नहीं।
निवेश के नाम पर ठगी से बचने के लिए पुलिस की सलाह
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि शेयर बाजार या किसी अन्य निवेश योजना में जल्दी और पक्के मुनाफे का दावा करने वालों से सावधान रहें।पुलिस ने निवेशकों को सलाह दी है कि अनजान कॉल, मैसेज, सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑनलाइन ग्रुप के जरिए मिलने वाले निवेश प्रस्तावों पर बिना जांच भरोसा न करें।इसके अलावा ओटीपी, पासवर्ड, बैंकिंग क्रेडेंशियल और अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। निवेश करने से पहले संबंधित प्लेटफॉर्म की विश्वसनीयता की जांच करना और केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेना जरूरी है।
साइबर ठगी होने पर तुरंत करें यह काम
पुलिस ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर देरी नहीं करनी चाहिए। पीड़ित तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत कर सकते हैं। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी घटना की जानकारी दी जा सकती है।समय पर शिकायत दर्ज कराने से पुलिस और संबंधित एजेंसियों को रकम के लेनदेन को रोकने और ठगी की गई राशि वापस पाने की कोशिश करने का बेहतर अवसर मिल सकता है।

