Delhi Crime: नई दिल्ली के कश्मीरी गेट थाना क्षेत्र में चलती स्लीपर बस में नाबालिग छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। घटना से जुड़े भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित करने के साथ पुलिस घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है।जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कपड़े, पीड़िता के कपड़े, बस के सीट कवर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को अपने कब्जे में लिया है। इन सभी साक्ष्यों को आगे वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।
कपड़ों और सीट कवर की होगी वैज्ञानिक जांच
पुलिस के कब्जे में लिए गए कपड़े और बस के सीट कवर मामले की जांच में अहम साबित हो सकते हैं। इन वस्तुओं की फॉरेंसिक जांच के जरिए ऐसे वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की कोशिश होगी, जो घटना से संबंधित परिस्थितियों को स्पष्ट करने में मदद कर सकें।जांच एजेंसी यह सुनिश्चित कर रही है कि जब्त सामग्री को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाए और उसकी जांच रिपोर्ट को आगे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
CCTV फुटेज से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश
पुलिस ने बस के आसपास और घटनास्थल से जुड़े क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी हासिल की है। फुटेज के विश्लेषण से आरोपियों की गतिविधियों और उनके आने-जाने से जुड़ी जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा रहा है।जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि संदिग्ध कब बस में पहुंचे, घटना के आसपास उनकी गतिविधियां कैसी थीं और इसके बाद वे किस दिशा में गए। उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।
बस में मौजूद लोगों और कर्मचारियों से पूछताछ
पुलिस बस के संचालन से जुड़े सभी पहलुओं को भी जांच रही है। बस में उस समय कौन-कौन मौजूद था, चालक और अन्य कर्मचारियों की भूमिका क्या थी तथा बस में सुरक्षा के क्या इंतजाम थे, इन बिंदुओं पर भी जानकारी जुटाई जा रही है।घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। जरूरत के अनुसार कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य तकनीकी जानकारी की भी जांच की जा सकती है।
फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच में हो सकती है अहम
पुलिस जब्त किए गए साक्ष्यों को वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। फॉरेंसिक रिपोर्ट से जांचकर्ताओं को उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।जांच पूरी होने के बाद इन रिपोर्ट और अन्य प्रमाणों को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में पेश किया जा सकता है। पुलिस का जोर इस बात पर है कि प्रत्येक साक्ष्य की सुरक्षित कस्टडी और दस्तावेजी प्रक्रिया में कोई कमी न रहे।
नाबालिग पीड़िता की निजता का रखा जा रहा ध्यान
मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण जांच के दौरान विशेष सावधानी बरती जा रही है। पुलिस और संबंधित विभाग पीड़िता की सुरक्षा तथा आवश्यक सहायता सुनिश्चित करने पर भी ध्यान दे रहे हैं।नाबालिग पीड़िता की पहचान और निजी जानकारी को सार्वजनिक होने से बचाना कानूनी रूप से भी आवश्यक है। इसी वजह से जांच से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को लेकर भी सावधानी बरती जा रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आएंगे नए तथ्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी जांच की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक और कानूनी तरीके से परीक्षण किया जाएगा तथा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।फिलहाल सीसीटीवी फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य और अन्य तकनीकी जानकारी पर जांच एजेंसियों का विशेष ध्यान है। इस मामले ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता सामने ला दी है।

