झारखंड के गिरिडीह में अलग-अलग योजनाओं के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पचंबा पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने राधा स्वामी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश सिन्हा, उनकी पत्नी अनीषा सिन्हा समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। अदालत में पेशी के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में गिरिडीह जेल भेज दिया गया।पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की जांच कर रही है। शुरुआती जांच में करीब 8 से 10 करोड़ रुपये की कथित ठगी से जुड़े साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। जांच का दायरा बढ़ने पर यह रकम और अधिक होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
चार आरोपी जेल भेजे गए, एक नामजद फरार
गिरफ्तार आरोपियों में मुकेश सिन्हा उर्फ मुकेश कुमार सिन्हा, उनकी पत्नी अनीषा सिन्हा, सुमित सिन्हा उर्फ सुमित कुमार सिन्हा और जितेंद्र कुमार उर्फ सुबोध सिंह शामिल हैं। चारों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।मामले में अमित सिन्हा नामक एक अन्य नामजद आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाश कर रही है। इसके साथ ही संगठन के मालिक और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
शिकायत के बाद शुरू हुई पुलिस की कार्रवाई
पचंबा थाना क्षेत्र के नावाटांड़ निवासी अमजद अंसारी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। शिकायत में संगठन से जुड़े लोगों पर वाहन, आवास, जमा राशि और अन्य योजनाओं में आकर्षक लाभ का भरोसा देकर लोगों से पैसे लेने का आरोप लगाया गया है।पचंबा थाना में कांड संख्या 85/26 के तहत BNS की संबंधित धाराओं और प्राइज चिट्स एंड मनी सर्कुलेशन स्कीम्स बैनिंग एक्ट 1978 के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
5 लाख रुपये देकर वाहन लेने का दावा
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे बाजार से कम कीमत पर चारपहिया वाहन दिलाने का प्रस्ताव दिया गया था। संगठन की सदस्यता लेने और निर्धारित रकम जमा करने के बाद वाहन उपलब्ध कराने तथा EMI की सुविधा का भरोसा दिया गया।उसने कथित तौर पर 5 लाख रुपये जमा किए। बाद में फाइनेंस के जरिए वाहन मिलने का दावा है, लेकिन करीब 8 से 10 महीने बाद EMI का भुगतान बंद हो गया। इसके बाद फाइनेंस कंपनी की ओर से भुगतान के लिए संपर्क किया जाने लगा।पुलिस के सामने अन्य लोगों ने भी इसी तरह अलग-अलग योजनाओं में पैसा जमा करने और बाद में परेशानी होने की शिकायतें रखी हैं।
60 से 70 प्रतिशत तक छूट का दावा
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह आरोप भी आया है कि लोगों को कुछ योजनाओं में 60 से 70 प्रतिशत तक छूट का लालच दिया जाता था। सस्ते वाहन, आवास, डिपॉजिट और अन्य योजनाओं के नाम पर लोगों को रकम लगाने के लिए तैयार किए जाने की बात कही जा रही है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित योजनाओं के जरिए कितने लोगों से पैसा लिया गया और कुल वित्तीय लेन-देन कितना हुआ।
थाने पहुंच रहे लोग, हजारों पीड़ित होने का दावा
आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग पचंबा थाने पहुंचे। कई लोगों ने वाहन योजना, सुकन्या योजना, आवास योजना और डिपॉजिट स्कीम में पैसा लगाने का दावा किया।कुछ लोगों का कहना है कि रकम लेने के बदले उन्हें बॉन्ड पेपर, चेक और अन्य दस्तावेज दिए गए थे। पुलिस इन कागजात की वास्तविकता और उनकी कानूनी वैधता की भी जांच कर रही है।
दो लग्जरी वाहन पुलिस ने किए जब्त
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से जुड़े दो चारपहिया वाहन जब्त किए हैं। इनमें टाटा सफारी और टाटा टिगोर शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इन वाहनों या अन्य संपत्तियों की खरीद में कथित ठगी से हासिल रकम का इस्तेमाल किया गया था या नहीं।इसके लिए बैंक खातों और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
पुराने धोखाधड़ी मामले में शमीम अख्तर का नाम भी चर्चा में
मामले के बीच गांडेय विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके शमीम अख्तर का नाम भी सामने आया है। हालांकि उन्हें मौजूदा मामले में गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों में शामिल नहीं बताया गया है।शमीम अख्तर को सितंबर 2025 में राधा स्वामी संगठन की वाहन योजना से जुड़े एक अलग धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने जागरूक जनता पार्टी के टिकट पर गांडेय से विधानसभा चुनाव लड़ा था। पुराने मामले में वाहन दिलाने के नाम पर रकम लेने और फाइनेंस भुगतान से जुड़ी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।
बैंक खातों से खुलेगा कथित नेटवर्क का पूरा राज
फिलहाल पुलिस का फोकस बैंक खातों, संपत्तियों और पैसों के लेन-देन की पड़ताल पर है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित योजनाओं का नेटवर्क कितने बड़े स्तर पर संचालित था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।चार आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे जा चुके हैं, जबकि एक नामजद आरोपी की तलाश जारी है। पुलिस के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के बाद कथित ठगी की वास्तविक रकम और पूरे नेटवर्क से जुड़ी तस्वीर अधिक साफ हो सकेगी।

