सरकार की सख्ती के बाद चीनी के थोक बाजार में कीमतों का रुख तेजी से बदला है। दिल्ली, मुंबई और गुवाहाटी समेत कई प्रमुख मंडियों में भाव नीचे आए हैं। हालांकि थोक बाजार की इस राहत का असर अभी खुदरा दुकानों पर साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा है। पिछले दो दिनों से रिटेल बाजार में चीनी की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं।मुंबई में यह गिरावट सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। 22 अगस्त को एक क्विंटल चीनी का थोक भाव करीब 6,750 रुपये तक पहुंच गया था। अब यही भाव घटकर लगभग 5,200 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। यानी कुछ ही दिनों में करीब 1,550 रुपये की कमी आई है।
दिल्ली में भी रिकॉर्ड स्तर से नीचे आया भाव
दिल्ली के थोक बाजार में भी चीनी की कीमतों में उल्लेखनीय नरमी आई है। एक समय भाव करीब 6,600 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। 2 सितंबर तक यह घटकर लगभग 5,700 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।इस तरह ऊंचे स्तर की तुलना में दिल्ली में करीब 900 रुपये प्रति क्विंटल की कमी दर्ज की गई है। मुंबई में गिरावट करीब 23 प्रतिशत और दिल्ली में करीब 13.6 प्रतिशत बैठती है।
थोक बाजार सस्ता, लेकिन खुदरा कीमत अभी स्थिर
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंडियों में चीनी के भाव इतने नीचे आ गए हैं तो ग्राहकों को इसका फायदा क्यों नहीं मिल रहा। इसका एक कारण बाजार में मौजूद पुराना स्टॉक हो सकता है।खुदरा दुकानदार पहले अधिक कीमत पर खरीदी गई चीनी बेच रहे होते हैं। इसलिए थोक बाजार में भाव घटने के तुरंत बाद दुकानों पर भी उसी अनुपात में कीमत कम होना जरूरी नहीं है। जैसे-जैसे कम कीमत पर खरीदा गया नया स्टॉक बाजार में पहुंचेगा, खुदरा कीमतों पर भी गिरावट का दबाव बन सकता है।
सप्लाई चेन भी तय करेगी ग्राहक को मिलने वाली राहत
मंडी से दुकान तक पहुंचने के बीच कई स्तर होते हैं। थोक व्यापारी, वितरक और खुदरा कारोबारी अलग-अलग मात्रा में स्टॉक रखते हैं। इसके अलावा परिवहन खर्च, स्थानीय मांग, उपलब्धता और व्यापारिक मार्जिन भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।इसी वजह से अलग-अलग शहरों में खुदरा कीमतों में कमी एक साथ दिखाई देना जरूरी नहीं है। यदि थोक भाव लगातार कम बने रहते हैं तो नई दरों पर खरीदा गया माल आने के बाद ग्राहकों को राहत मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
त्योहारी सीजन में चीनी की कीमत पर रहेगी नजर
चीनी सिर्फ घरेलू रसोई की जरूरत नहीं है। मिठाई, बेकरी, पेय पदार्थ और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी इसकी बड़ी खपत होती है। त्योहारों के दौरान मिठाई और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने से चीनी की खपत भी बढ़ सकती है।ऐसे में आने वाले दिनों में मांग और आपूर्ति का संतुलन कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। सरकार और कारोबारियों की नजर भी इस बात पर रहेगी कि मौजूदा थोक गिरावट आगे कितने समय तक कायम रहती है।
ग्राहकों के लिए असली राहत का इंतजार
चीनी के थोक भाव में आई मौजूदा गिरावट उपभोक्ताओं के लिए सरात्मक संकेत जरूर है, लेकिन इसका वास्तविक फायदा तभी माना जाएगा जब खुदरा बाजार में भी कीमतें नीचे आएं।मुंबई में करीब 6,750 रुपये से घटकर 5,200 रुपये और दिल्ली में करीब 6,600 रुपये से घटकर 5,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा थोक भाव बाजार में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। अब नजर इस बात पर है कि यह राहत खुदरा बाजार तक कितनी जल्दी पहुंचती है और आम ग्राहक को चीनी खरीदते समय इसका कितना फायदा मिलता है।

