श्रीनगर में बागवानी योजना और विपणन विभाग के निदेशक गुलाम जीलानी जरगर ने बताया कि पिछले सेब सीजन में कश्मीर से करीब 25,000 मीट्रिक टन सेब रेल के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाए गए। उन्होंने रेल परिवहन को कश्मीर के बागवानी उत्पादों के लिए तेजी से उभरते उपयोगी विकल्प के तौर पर बताया।
जरगर के मुताबिक, कश्मीर को देश के दूसरे हिस्सों से रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ना बागवानी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। खासकर सेब की भारी आवक वाले सीजन में रेल सेवा सड़क परिवहन के मुकाबले एक अतिरिक्त और किफायती विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
रेल माल ढुलाई और Ro-Ro सेवा पर जोर
श्रीनगर के राजबाग में बागवानी योजना और विपणन निदेशालय की ओर से हितधारकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता निदेशक गुलाम जीलानी जरगर ने की। इसमें बागवानी उत्पादों की ढुलाई के लिए रेलवे माल ढुलाई और रोल-ऑन/रोल-ऑफ यानी Ro-Ro सेवाओं के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा हुई।
जरगर ने कहा कि रेलवे की इन सुविधाओं का प्रभावी उपयोग परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे फलों को बाजारों तक समय पर पहुंचाने में मदद मिलेगी और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी कई परेशानियां कम की जा सकेंगी।
सेब सीजन में सड़क मार्ग की चुनौतियां बढ़ाती हैं परेशानी
कश्मीर के सेब उत्पादकों के लिए मुख्य सीजन में सड़क परिवहन लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी यातायात, यातायात प्रतिबंध, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण कई बार आवाजाही प्रभावित होती है। राजमार्ग बंद होने या परिवहन में देरी का सीधा असर फलों की समय पर बाहरी बाजारों तक पहुंच पर पड़ता है।
ऐसे हालात में रेलवे को वैकल्पिक परिवहन माध्यम के रूप में मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। रेल नेटवर्क का व्यापक इस्तेमाल होने से उत्पादकों और व्यापारियों को परिवहन के लिए एक भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।
उत्पादकों से लेकर कारोबारियों तक मिल सकता है लाभ
विभाग का मानना है कि बेहतर रेल कनेक्टिविटी से कश्मीर के बागवानी क्षेत्र की पूरी सप्लाई चेन को फायदा पहुंच सकता है। कम समय में अधिक मात्रा में फल बाहर भेजने की क्षमता बढ़ने से उत्पादकों, व्यापारियों और अन्य संबंधित कारोबारियों के सामने आने वाली परिवहन संबंधी दिक्कतें कम हो सकती हैं।

