रीवा। संजय गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की लगातार सामने आ रही अव्यवस्थाओं के बीच सोमवार रात प्रशासन ने अचानक अस्पताल का जायजा लिया। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी और पुलिस अधीक्षक गुरू करण सिंह बिना किसी पूर्व सूचना के अस्पताल पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अलग-अलग वार्डों का निरीक्षण किया और मरीजों से सीधे बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
अस्पताल में सफाई की खराब स्थिति देखकर अधिकारियों ने जिम्मेदार कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों को इलाज के साथ साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
इमरजेंसी वार्ड की हालत देख अधिकारी भी रह गए हैरान
औचक निरीक्षण के दौरान अधिकारी सीधे इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। यहां सफाई व्यवस्था बेहद खराब मिली। अस्पताल परिसर में गंदगी और अव्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
पिछले करीब एक महीने से संजय गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल अलग-अलग शिकायतों और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा है। मरीज को जिंदा होने के बावजूद मृत घोषित किए जाने और प्रसूता की मौत जैसे मामलों को लेकर पिछले एक सप्ताह से विरोध प्रदर्शन भी चल रहा है।
पुराने गद्दे देखकर सामने आई लापरवाही, अब कटेगा वेतन
कलेक्टर ने अस्पताल के कई विभागों का निरीक्षण किया। ऑर्थोपेडिक्स वार्ड में पुराने गद्दे खुले स्थान पर पड़े मिले। इस संबंध में जब वहां मौजूद कर्मचारियों से सवाल किया गया तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने पुराने गद्दों को तत्काल हटाने के निर्देश दिए। साथ ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों का सात दिन का वेतन काटने का आदेश दिया।
सफाई से सुरक्षा तक, हर स्तर पर व्यवस्था सुधारने के निर्देश
औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासन ने अस्पताल में सफाई, सुरक्षा और अनुशासन को लेकर सख्त रुख अपनाया। अधिकारियों ने साफ किया कि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
यह निरीक्षण ऐसे समय हुआ है जब अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार प्रदर्शन और शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में प्रशासन की अचानक हुई कार्रवाई को विरोध के बीच उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब मरीजों को बदलाव का इंतजार
संजय गांधी मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए रीवा के अलावा आसपास के कई क्षेत्रों से मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल की व्यवस्था सीधे हजारों मरीजों और उनके परिजनों से जुड़ी है।
औचक निरीक्षण और कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में जमीन पर कितना बदलाव आता है। मरीजों और उनके परिजनों की नजर अब इस बात पर है कि प्रशासन के सख्त निर्देशों के बाद इलाज, सफाई और सुरक्षा की स्थिति वास्तव में कितनी बेहतर होती है।

