हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दौरे के बाद कथित शुद्धिकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रहने वाला है। कांग्रेस ने इसे दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए देशव्यापी अभियान का रूप देने की रणनीति बनाई है। पार्टी की नजर उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनावों पर भी है।
देहरादून से सड़क पर उतरी कांग्रेस, सीएम आवास तक निकला मार्च
उत्तराखंड कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर देहरादून में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी महासचिव प्रभारी और सिरसा सांसद कुमारी शैलजा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आवास तक मार्च निकाला। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में अब तक अपेक्षित कानूनी कार्रवाई नहीं हुई है।
जालंधर में भी वरिष्ठ नेताओं ने संभाली कमान
पंजाब के जालंधर में कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर विरोध मार्च निकाला। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। पंजाब में होने वाले राजनीतिक मुकाबले को देखते हुए कांग्रेस इस मुद्दे को राज्य की राजनीति से जोड़कर भी देख रही है।
शैलजा ने बीजेपी और RSS पर लगाए गंभीर आरोप
कुमारी शैलजा ने कहा कि बीजेपी और RSS पर सामाजिक, धार्मिक और जातीय आधार पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कथित शुद्धिकरण की घटना केवल कांग्रेस अध्यक्ष का अपमान नहीं है, बल्कि इसे उत्तराखंड के लोगों के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाना चाहिए। कांग्रेस ने इस मामले में FIR दर्ज नहीं होने पर भी सवाल उठाए हैं।
कमजोर संगठन को मुद्दे के सहारे मजबूत करने की कोशिश
कांग्रेस की रणनीति का एक अहम पहलू उत्तराखंड में अपने संगठन को मजबूत करना भी माना जा रहा है। राज्य में बीजेपी का जमीनी कैडर लंबे समय से मजबूत और संगठित रहा है। ऐसे में कांग्रेस सामाजिक न्याय और दलित सम्मान जैसे व्यापक मुद्दों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और अपने अभियान को गांवों तथा स्थानीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर सकती है।
स्थानीय विवाद से राष्ट्रीय बहस तक ले जाने की तैयारी
कांग्रेस अब इस घटना को केवल हल्द्वानी की राजनीतिक घटना के तौर पर नहीं देख रही है। पार्टी इसे जातिगत भेदभाव, दलित सम्मान और सामाजिक न्याय से जुड़े बड़े सवाल के रूप में सामने रखने की तैयारी में है। चुनावी राज्यों में इस मुद्दे को कितना राजनीतिक समर्थन मिलता है, यह आने वाले दिनों में कांग्रेस की रणनीति और बीजेपी के जवाब से साफ होगा।

