पंजाब में बिजली की बढ़ती किल्लत अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गई है। राज्य के कई इलाकों में लंबे पावर कट को लेकर विपक्ष ने आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, सरकार की ओर से मौजूदा संकट के पीछे बिजली की बढ़ी मांग, उत्पादन में कमी और निजी थर्मल यूनिट में आई तकनीकी खराबी को प्रमुख वजह बताया गया है।
सुखबीर बादल ने सरकार पर साधा निशाना
बालाचौर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने दावा किया कि पंजाब के लोगों को कई इलाकों में 10 घंटे तक बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मौजूदा स्थिति की तुलना अकाली दल की पिछली सरकारों के समय की बिजली व्यवस्था से की।
बादल ने कहा कि उनकी सरकार के दौरान पंजाब को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए बड़े स्तर पर थर्मल पावर प्रोजेक्ट लगाए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में राज्य की बिजली व्यवस्था कमजोर हुई है।
सत्ता में लौटे तो फिर बिजली सरप्लस बनाने का दावा
अकाली दल प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी दोबारा सत्ता में आती है तो पंजाब को फिर से बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बनाने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना था कि पहले स्थापित किए गए बिजली संयंत्रों ने राज्य की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई थी।
बादल ने मौजूदा बिजली संकट को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि लोगों को लंबे समय तक कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने बताई बिजली संकट की असली वजह
पंजाब के कैबिनेट मंत्री तरनप्रीत सिंह सोंड ने बिजली संकट को लेकर सरकार का पक्ष रखा। उनके मुताबिक इस समय राज्य में बिजली की मांग करीब 17,000 मेगावाट तक पहुंच गई है, जबकि उपलब्धता लगभग 14,000 मेगावाट है। इस तरह मांग और आपूर्ति के बीच करीब 3,000 मेगावाट का अंतर बना हुआ है।
मंत्री ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली करीब 1,000 मेगावाट बिजली का हिस्सा भी इस समय पंजाब को नहीं मिल रहा है। सरकार इस मुद्दे को केंद्र के सामने उठा रही है।
तकनीकी खराबी से भी प्रभावित हुआ उत्पादन
सोंड के अनुसार पंजाब के सरकारी बिजली उत्पादन केंद्र लगातार संचालित किए जा रहे हैं। हालांकि निजी क्षेत्र की कुछ उत्पादन इकाइयों में तकनीकी खराबी आने के कारण उपलब्ध बिजली पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
उन्होंने बताया कि बंद हुई इकाइयों में से एक को दोबारा शुरू कर दिया गया है। बाकी इकाइयों को भी अगले 24 से 48 घंटे में चालू करने का प्रयास किया जा रहा है। इनके शुरू होने के बाद बिजली की उपलब्धता बढ़ने और कमी को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
मांग बढ़ी तो बिजली व्यवस्था पर बढ़ा दबाव
पंजाब में मौजूदा संकट के पीछे सबसे बड़ी चुनौती बिजली की ऊंची मांग है। जब मांग उपलब्ध उत्पादन से काफी ऊपर चली जाती है, तब ग्रिड पर दबाव कम करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली कटौती करनी पड़ सकती है।
अब सरकार की नजर बंद पड़ी उत्पादन इकाइयों को जल्द बहाल करने और अतिरिक्त बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार हमला कर रहा है।

