Delhi Metro: दिल्ली में पुराने कपड़ों को कचरे के ढेर या लैंडफिल तक पहुंचने से रोकने के लिए शुरू की गई अर्पण केंद्र पहल को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों में 31 अगस्त तक 41 टन से अधिक पुराने कपड़े जमा हो चुके हैं। इन कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है।
करीब 42 हजार किलो कपड़े हुए जमा
आंकड़ों के अनुसार, 3,940 लोगों ने अर्पण केंद्रों पर कुल 41,181.59 किलोग्राम पुराने कपड़े जमा किए। इनमें सबसे ज्यादा 9,861.40 किलोग्राम कपड़े डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन के केंद्र पर पहुंचे। इसके बाद शालीमार बाग में 9,761.03 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए।
पंजाबी बाग वेस्ट में 6,534.98 किलोग्राम, शाहदरा में 6,386.08 किलोग्राम और मयूर विहार-1 में 5,189.40 किलोग्राम पुराने कपड़े एकत्र हुए। वहीं हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-काकरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए।
पुराने कपड़ों से बन रहे उपयोगी उत्पाद
जमा किए गए कपड़ों में से करीब 4,266 किलोग्राम सामग्री को रीयूज और अपसाइक्लिंग के लिए अलग रखा गया है। वहीं 29,424 किलोग्राम कपड़े रीसाइक्लिंग के लिए भेजे गए हैं।
स्वयं सहायता समूह इन पुराने कपड़ों को गलीचे, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसे उपयोगी सामान में बदल रहे हैं। तैयार किए गए उत्पादों को अर्पण केंद्रों पर प्रदर्शित भी किया जा रहा है। इन उत्पादों की बिक्री से अब तक 27,036 रुपये की आय भी हुई है।
अगले चरण में 10 और केंद्र खोलने की तैयारी
यह पहल अभी 10 मेट्रो स्टेशनों तक सीमित है, लेकिन इसे और विस्तार देने की योजना बनाई गई है। जनवरी 2027 में मॉडल टाउन, INA, IP एक्सटेंशन, पश्चिम विहार वेस्ट, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी वेस्ट, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर 10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशनों पर 10 नए अर्पण केंद्र शुरू करने का प्रस्ताव है।
पुराने कपड़ों के जिम्मेदार निपटारे पर जोर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पहल को पुराने कपड़ों के निपटारे का व्यावहारिक तरीका बताया है। उनका कहना है कि लोगों की भागीदारी से पुराने कपड़ों को दोबारा उपयोग में लाने और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है।
इस पहल का मकसद सिर्फ पुराने कपड़ों को इकट्ठा करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा उपयोगी बनाकर कचरा कम करना भी है। इससे एक ऐसा चक्र तैयार हो रहा है, जिसमें अनुपयोगी समझे जाने वाले कपड़े नए उत्पादों का रूप लेकर फिर से इस्तेमाल में आ रहे हैं।

