दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को केवल गर्भावस्था और मातृत्व तक सीमित रखने के बजाय जीवन के हर चरण से जोड़ने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए हेल्थकेयर व्यवस्था में बीमारी की रोकथाम, समय रहते बीमारी की पहचान, बेहतर इलाज, मेडिकल रिसर्च और स्वास्थ्य जागरूकता को बराबर महत्व मिलना चाहिए।
उन्होंने यह बात एसोसिएशन ऑफ ऑब्सटेट्रिशियन्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स ऑफ दिल्ली यानी AOGD के 48वें वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कही।
महिलाओं की सेहत को जीवन के हर चरण से जोड़ने की जरूरत
उपराज्यपाल ने कहा कि महिलाओं की स्वास्थ्य जरूरतें किशोरावस्था से शुरू होकर प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भावस्था, प्रसव और बढ़ती उम्र तक लगातार बदलती रहती हैं। ऐसे में मेडिकल केयर का दायरा भी इसी तरह व्यापक होना चाहिए।
उन्होंने सम्मेलन की थीम With HER: Heal, Empower, Respect… Every Step of the Way का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला स्वास्थ्य को केवल मां बनने से जुड़ी सेवाओं तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। बीमारी से बचाव और शुरुआती जांच के साथ क्लिनिकल केयर, रिसर्च और जागरूकता को भी स्वास्थ्य व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना होगा।
एनीमिया और कैंसर जैसी चुनौतियों पर जताई चिंता
संधू ने महिलाओं के रिप्रोडक्टिव और मैटरनल हेल्थकेयर में हुई प्रगति को महत्वपूर्ण बताया, लेकिन साथ ही कई गंभीर चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने एनीमिया, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी और महिलाओं में होने वाले कैंसर को लगातार बनी हुई प्रमुख समस्याओं में शामिल बताया।
उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में मौजूद असमानता को भी गंभीर मुद्दा बताया। उपराज्यपाल ने महिलाओं से अपील की कि बीमारी के लक्षण गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय शुरुआती संकेत मिलने पर ही डॉक्टर से सलाह लें।
डॉक्टरों की भूमिका इलाज तक सीमित नहीं
उपराज्यपाल ने कहा कि डॉक्टर केवल मरीज का इलाज करने वाले विशेषज्ञ नहीं हैं, बल्कि वे स्वास्थ्य शिक्षा और सही जानकारी पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समाज के अलग-अलग वर्गों की महिलाओं तक पोषण, प्रजनन स्वास्थ्य, टीकाकरण और कैंसर स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं की बेहतर सेहत का सीधा संबंध देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति से है। महिलाओं के स्वास्थ्य में किया गया निवेश वास्तव में भारत की मानव पूंजी और भविष्य में किया गया निवेश है।
AI और टेलीमेडिसिन से बदल सकता है इलाज का तरीका
संधू ने मेडिकल क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही तकनीक की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड इमेजिंग, टेलीमेडिसिन और डेटा आधारित रिसर्च का इस्तेमाल बीमारी की जल्द पहचान और मरीज की जरूरत के अनुसार इलाज तैयार करने में किया जा सकता है।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मेडिकल रिसर्च भारत की अपनी आबादी और यहां की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर होनी चाहिए। उनके मुताबिक भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार रिसर्च ही देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ज्यादा प्रभावी साबित होगी।
मेडिकल संस्थानों और नीति निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने की अपील
उपराज्यपाल ने अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों, विश्वविद्यालयों और नीति निर्माताओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिसर्च से मिलने वाली जानकारी को वास्तविक मरीजों के बेहतर इलाज और क्लिनिकल नतीजों में बदलने के लिए संस्थानों के बीच सहयोग जरूरी है।
उन्होंने AOGD जैसे सम्मेलनों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों के बीच नए विचार, अनुभव और रिसर्च साझा करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।
युवा डॉक्टरों से लगातार सीखते रहने का आह्वान
युवा डॉक्टरों और पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए संधू ने कहा कि आज की मेडिकल दुनिया में उनके सामने अवसरों के साथ बड़ी जिम्मेदारियां भी हैं। उन्होंने युवा चिकित्सकों से नई तकनीक और बदलती मेडिकल प्रक्रियाओं को सीखते रहने की अपील की।
साथ ही उन्होंने कहा कि तकनीकी दक्षता के साथ डॉक्टरों में संवेदनशीलता और सहानुभूति भी बनी रहनी चाहिए। मरीज को केवल एक मेडिकल केस के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं और जरूरतों वाले इंसान के रूप में समझना भी अच्छे इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

