नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए कर्मठता, साहस, धैर्य और ज्ञान को समृद्धि से जोड़ा। पीएम मोदी ने महाभारत के शान्तिपर्व से लिया गया श्लोक साझा किया और इसके जरिए बताया कि दृढ़ संकल्प के साथ अपने कर्तव्यों में जुटा रहने वाला व्यक्ति सफलता और समृद्धि से दूर नहीं होता।
पीएम मोदी ने लिखा हुआ श्लोक है-
अद्वैधमनसं युक्तं शूरं धीरं विपश्चितम्।
न श्रीः सन्त्यजते नित्यमादित्यमिव रश्मयः॥
क्या है श्लोक का सरल अर्थ
इस श्लोक का भावार्थ है कि जिस व्यक्ति का मन दुविधा से मुक्त हो, जो अपने काम के प्रति समर्पित और अनुशासित रहे, जो साहसी, धैर्यवान और विद्वान हो, उसके साथ समृद्धि बनी रहती है। जिस तरह सूर्य और उसकी किरणों का संबंध कभी अलग नहीं होता, उसी तरह ऐसे व्यक्ति का साथ श्री यानी समृद्धि नहीं छोड़ती।
हर शब्द में छिपा है सफलता का संदेश
श्लोक में अद्वैधमनसं का अर्थ ऐसे व्यक्ति से है जिसका मन दुविधा में न हो और जो अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ हो। युक्तं का भाव अनुशासित और अपने कर्तव्य में लगातार लगे रहने वाले व्यक्ति से है।
इसी तरह शूरं वीरता और पराक्रम का प्रतीक है, जबकि धीरं संकट की स्थिति में भी धैर्य बनाए रखने वाले व्यक्ति को दर्शाता है। विपश्चितम् का अर्थ विद्वान और बुद्धिमान व्यक्ति से है। आगे कहा गया है कि श्री यानी समृद्धि ऐसे व्यक्ति का साथ नहीं छोड़ती।
सूर्य और किरणों का दिया उदाहरण
श्लोक के अंतिम हिस्से में समृद्धि और व्यक्ति के संबंध को सूर्य और उसकी किरणों के उदाहरण से समझाया गया है। जिस प्रकार सूर्य की किरणें सूर्य से अलग नहीं होतीं, उसी तरह कर्मठ, साहसी, धैर्यवान और ज्ञानी व्यक्ति के जीवन में समृद्धि बनी रहती है।
पहले भी नेतृत्व और जनसेवा पर श्लोक साझा कर चुके हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले भी सोशल मीडिया पर सुभाषितम के जरिए संस्कृत श्लोक साझा करते रहे हैं। 11 सितंबर को उन्होंने महाभारत के शान्तिपर्व का एक श्लोक साझा किया था, जिसमें जनप्रतिनिधियों के कर्तव्यों और समाज में न्याय, समरसता तथा लोककल्याण की भावना पर जोर दिया गया था।
इससे पहले 10 जून को भी पीएम मोदी ने एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए जनसेवा, सुशासन, विनम्रता और जनकल्याण को अच्छे नेतृत्व से जोड़ा था। इन पोस्ट के जरिए वह प्राचीन संस्कृत साहित्य में बताए गए आदर्शों को वर्तमान जीवन और सार्वजनिक जिम्मेदारियों के संदर्भ में सामने रखते रहे हैं।

