मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को नए सिरे से मजबूत करने की तैयारी शुरू हो गई है। करीब 20 साल बाद प्रदेश में सरकारी नियंत्रण वाली बस सेवा फिर से शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना का शुभारंभ आज भोपाल में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे।
योजना के पहले चरण में प्रदेश के 7 शहरों के बीच 351 बसें संचालित की जाएंगी। इनमें सबसे ज्यादा 145 बसें इंदौर को, 106 बसें भोपाल को और 67 बसें जबलपुर को मिलेंगी। बाकी बसों का आवंटन अन्य चयनित शहरों के लिए किया जाएगा।
351 बसों से शुरुआत, 2031 तक 15 हजार बसों का बड़ा लक्ष्य
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर संचालित किया जाएगा। शुरुआती चरण में 180 बसें पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा जरूरत के अनुसार निजी ऑपरेटरों से बसें किराए पर ली जाएंगी।
सरकार ने योजना को शुरुआती 351 बसों तक सीमित नही रखने का लक्ष्य रखा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार 2031 तक प्रदेश में करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सेवा पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है।
महिलाओं की सुरक्षा पर खास फोकस, हर बस में CCTV और पैनिक बटन
नई बस सेवा में यात्रियों की सुरक्षा के लिए तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बसों में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। बस के भीतर होने वाली गतिविधियों पर कमांड-कंट्रोल सेंटर से नजर रखी जा सकेगी।
किसी आपात स्थिति में यात्री बस में मौजूद पैनिक बटन का इस्तेमाल कर सकेंगे। बटन दबाते ही कमांड-कंट्रोल सेंटर और पुलिस तक अलर्ट पहुंचाने की व्यवस्था रहेगी।
मोबाइल पर मिलेगी बस की लाइव लोकेशन, इंतजार का समय भी पता चलेगा
हर बस में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस यानी VLTD लगाया जाएगा। इसके जरिए बस की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। यात्रियों को मोबाइल के माध्यम से बस की लाइव लोकेशन और उसके पहुंचने की संभावित जानकारी मिल सकेगी।
बसों और बस स्टॉप पर पैसेंजर इनफॉरमेशन सिस्टम यानी PIS भी लगाया जाएगा। डिस्प्ले के जरिए यात्रियों को रूट, बस संचालन और अगले स्टॉप से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
ITMS से कंट्रोल होगी पूरी बस सेवा, रूट और स्पीड पर रहेगी नजर
बस सेवा के संचालन को व्यवस्थित रखने के लिए इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम यानी ITMS का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके जरिए बसों की लोकेशन, स्पीड, रूट और समयबद्धता की निगरानी की जाएगी।
कमांड-कंट्रोल सेंटर से बसों के संचालन की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इससे बस सेवा को तय समय के अनुसार चलाने और संचालन से जुड़ी समस्याओं पर तेजी से नजर रखने में मदद मिलेगी।
सुरक्षित ड्राइविंग के लिए चालकों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
नई बस सेवा में ड्राइवरों की भूमिका भी अहम रहेगी। बस संचालन से पहले चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षित ड्राइविंग और यातायात व्यवस्था के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मध्यप्रदेश यात्री परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात सहायक कंपनियों में कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए है। इन्ही केंद्रों से बसों की गतिविधियों और संचालन व्यवस्था की निगरानी की जाएगी।
गांवों तक परिवहन पहुंचाने की तैयारी, 2031 का लक्ष्य कितना बड़ा
सरकार की योजना केवल बड़े शहरों तक सीमित बस सेवा शुरू करने की नही है। 2031 तक 15 हजार बसों के संचालन और 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक सार्वजनिक परिवहन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
अगर योजना तय रोडमैप के अनुसार आगे बढ़ती है तो इसका असर शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी पर भी पड़ सकता है। पहले चरण की 351 बसें इसी बड़े परिवहन नेटवर्क की शुरुआती कड़ी मानी जा रही है।

