लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में स्वतंत्रता सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और विपक्ष के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है।अखिलेश यादव के ये बयान उनके राजनीतिक आरोप हैं। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसी दिन उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर 2017 से पहले की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उस समय माफिया का प्रभाव था और पुलिस कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पाती थी।
अखिलेश बोले- पुलिस को निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए
सपा प्रमुख ने कहा कि पुलिस को किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता की तरह नहीं, बल्कि कानून के अनुसार निष्पक्ष संस्था के रूप में काम करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में पुलिस व्यवस्था पर राजनीतिक प्रभाव बढ़ा है और इसका असर विपक्षी नेताओं व कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है।अखिलेश ने यह भी कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी अलग-अलग मामलों में सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, अदालतों की टिप्पणियां अलग-अलग मामलों और परिस्थितियों से संबंधित होती हैं, इसलिए उन्हें प्रदेश पुलिस पर एक समान निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
बोले- सत्ता परिवर्तन के बाद बदलेगी व्यवस्था
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रशासनिक संस्थाओं की निष्पक्षता लोकतंत्र के लिए जरूरी है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश में राजनीतिक बदलाव के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव की जरूरत होगी।उन्होंने अपने समर्थकों के बीच ‘भाजपा हटेगी, संकट हटेगा’ का नारा भी दिया और लोकतंत्र तथा संविधान से जुड़े मुद्दों को जनता तक पहुंचाने की अपील की।
आपातकाल का जिक्र, महंगाई और बेरोजगारी पर भी सरकार को घेरा
अखिलेश यादव ने आपातकाल के दौर का जिक्र करते हुए मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव जैसे मुद्दे उठाए।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्रता सेनानियों और लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उनके मुताबिक, विपक्ष की भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान से जुड़े मुद्दों को उठाना भी उसकी जिम्मेदारी है।
कानून-व्यवस्था पर BJP और SP के अलग-अलग दावे
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था लंबे समय से भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बहस का विषय रही है। भाजपा सरकार 2017 के बाद अपराध और माफिया के खिलाफ कार्रवाई को अपनी उपलब्धियों में गिनाती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को भी कहा कि 2017 से पहले माफिया का प्रभाव था और पुलिस उनके सामने मजबूर थी।वहीं, समाजवादी पार्टी पुलिस कार्रवाई में कथित पक्षपात और प्रशासन पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाती रही है। अखिलेश यादव ने भी गुरुवार को इसी मुद्दे को उठाते हुए पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
2027 विधानसभा चुनाव से पहले तेज हो रही राजनीतिक गतिविधियां
अखिलेश यादव के ताजा बयान ऐसे समय आए हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। समाजवादी पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दे रही है।
अखिलेश यादव हाल के दिनों में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से जुड़े मुद्दों को भी लगातार उठाते रहे हैं। रायबरेली से पार्टी की पीडीए रथ यात्रा की शुरुआत भी हो चुकी है।इससे पहले अखिलेश यादव ने कई भाजपा विधायकों के सपा के संपर्क में होने का दावा भी किया था, हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।फिलहाल उत्तर प्रदेश में पुलिस की भूमिका, कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक बहस के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

