धार जिले के धामनोद में भाजपा के भीतर ही सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है. मामला इतना बढ़ गया है कि धरमपुरी से भाजपा विधायक कालू सिंह ठाकुर ने अपनी ही पार्टी की केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर के निवास के सामने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने का ऐलान कर दिया है.
विधायक ने 9 अक्टूबर 2026 से आंदोलन शुरू करने की बात कही है. विवाद धामनोद नगर परिषद की CMO माया मंडलोई की कार्यप्रणाली और उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों से जुड़ा है.
CMO को लेकर विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
कालू सिंह ठाकुर का आरोप है कि CMO माया मंडलोई की कार्यप्रणाली और कथित भ्रष्टाचार के कारण धामनोद नगर का विकास प्रभावित हो रहा है. उनका दावा है कि नगर की समस्याओं को लेकर जनता, व्यापारी और पार्षद कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला.
विधायक के मुताबिक उन्होंने इस मामले की जानकारी कलेक्टर, SDM, तहसीलदार और पुलिस अधिकारियों सहित संबंधित अधिकारियों को कई बार दी है. उनका यह भी दावा है कि CMO के खिलाफ पहले FIR दर्ज हो चुकी है और उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई भी हुई थी, लेकिन बाद में वह दोबारा पद पर बनी रही.
विधायक बोले- विकास के रास्ते में कोई बाधा स्वीकार नहीं
विधायक कालू सिंह ठाकुर ने साफ किया है कि धामनोद और धरमपुरी क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों पर वह पीछे नहीं हटेंगे. उनका कहना है कि जनता की समस्याओं का समाधान होना चाहिए और नगर के विकास में किसी तरह की रुकावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
उन्होंने स्थायी समाधान होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है. ऐसे में 9 अक्टूबर से प्रस्तावित भूख हड़ताल भाजपा के अंदर चल रही खींचतान को और खुलकर सामने ला सकती है.
केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर केंद्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने विधायक के आंदोलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि यदि विधायक उनके निवास पर आते है तो उनका स्वागत किया जाएगा और उनके लिए चाय-नाश्ते की व्यवस्था भी की जाएगी.
सावित्री ठाकुर ने सवाल उठाया कि उनके कारण विकास किस तरह रुक रहा है. उन्होंने कहा कि CMO माया मंडलोई न्यायालय से स्टे आदेश लेकर आई है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह केंद्रीय राज्य मंत्री है.
भाजपा के भीतर की लड़ाई पर टिकी सबकी नजर
धामनोद का यह विवाद इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि केंद्र और मध्य प्रदेश दोनों जगह भाजपा की सरकार है और आंदोलन करने वाले विधायक भी भाजपा से है. इसके बावजूद पार्टी के दो प्रमुख जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद अब सार्वजनिक हो गया है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 9 अक्टूबर को विधायक की प्रस्तावित भूख हड़ताल किस रूप में सामने आती है और पार्टी नेतृत्व इस विवाद को शांत कराने के लिए क्या कदम उठाता है. धामनोद की इस सियासी खींचतान पर स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति की नजर भी बनी हुई है.

