लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने इस बार किसी भी मौजूदा राज्यसभा सदस्य को दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया। इस सूची में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे और मौजूदा BJP सांसद नीरज शेखर का नाम नहीं होना सबसे ज्यादा चर्चा में है।
BJP की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है।
चंद्रशेखर परिवार की संसद में लंबी मौजूदगी पर लगा विराम
नीरज शेखर को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद चंद्रशेखर परिवार की संसद में मौजूदगी का सिलसिला फिलहाल थमता दिखाई दे रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 37 साल बाद ऐसा मौका आया है जब बलिया का यह राजनीतिक परिवार संसद के किसी भी सदन में प्रतिनिधित्व नहीं करेगा।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भारतीय राजनीति के प्रमुख समाजवादी नेताओं में गिने जाते थे। बलिया से उनका लंबा राजनीतिक जुड़ाव रहा और वे कई बार लोकसभा पहुंचे। उनके निधन के बाद उनके बेटे नीरज शेखर ने राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।
नीरज शेखर पहले समाजवादी पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे और बाद में BJP में शामिल होकर उच्च सदन के सदस्य बने। इस बार BJP की सूची में उनका नाम नहीं होने से उनकी अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
BJP ने सिर्फ नीरज शेखर ही नहीं, सभी मौजूदा सदस्यों को बदला
नीरज शेखर को टिकट नहीं मिलने को अलग घटनाक्रम के तौर पर देखने के बजाय BJP की पूरी सूची पर नजर डालना भी जरूरी है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश से अपने किसी भी निवर्तमान राज्यसभा सदस्य को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया।
नीरज शेखर के अलावा हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, अरुण सिंह, बृजलाल, सीमा द्विवेदी और गीता शाक्य जैसे मौजूदा या निवर्तमान सदस्यों को भी नई सूची में जगह नहीं मिली। Dinesh Sharma पहले ही राज्यसभा से इस्तीफा देकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल पद पर जा चुके हैं।
इस लिहाज से नीरज शेखर को टिकट नहीं मिलना केवल एक परिवार तक सीमित फैसला नहीं है, बल्कि BJP ने इस चुनाव में पूरी तरह नए चेहरों को मैदान में उतारा है।
नई सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर जोर
BJP की नई सूची में अलग अलग सामाजिक वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई देती है। रिपोर्टों के अनुसार सूची में OBC, दलित और सामान्य वर्ग के नेताओं को जगह मिली है। धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यसागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत और अन्य नामों के जरिए पार्टी ने संगठन और सामाजिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।
राजनीतिक विश्लेषण में इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि BJP ने नीरज शेखर को टिकट नहीं देने की कोई अलग वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है, इसलिए उनके टिकट कटने के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन भी रहा चर्चा का विषय
नीरज शेखर के राजनीतिक सफर में लोकसभा चुनावों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहा है। वे बलिया से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन दोनों मौकों पर उन्हें जीत नहीं मिली। 2024 में BJP के उम्मीदवार के तौर पर वे बलिया सीट से समाजवादी पार्टी के सनातन पांडेय से चुनाव हार गए थे।
पूर्वांचल की राजनीति में चंद्रशेखर परिवार की पुरानी पहचान के बावजूद चुनावी राजनीति में नीरज शेखर को अपने पिता जैसी लगातार लोकसभा सफलता नहीं मिली। यही वजह है कि अब राज्यसभा की राजनीति से बाहर होने के बाद उनकी अगली भूमिका को लेकर अटकलें तेज हैं।
क्या विधानसभा चुनाव से फिर सक्रिय होगी शेखर परिवार की राजनीति
राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने के बाद चंद्रशेखर परिवार के लिए उत्तर प्रदेश की विधानसभा राजनीति एक संभावित रास्ता हो सकती है। उनके परिवार से विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाएं पहले से चलती रही हैं। हालांकि नीरज शेखर या उनके परिवार की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बलिया की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव रखने वाला शेखर परिवार अब किस भूमिका में नजर आएगा। राज्यसभा का रास्ता बंद होने के बाद विधानसभा की राजनीति में नई शुरुआत होती है या कोई दूसरी जिम्मेदारी मिलती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

