केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में जल्द ही बड़ा कैबिनेट फेरबदल देखने को मिल सकता है। उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। खास बात यह है कि कुछ मौजूदा केंद्रीय मंत्रियों को इस बार राज्यसभा का टिकट नही मिला है। ऐसे में उनके मंत्री पद को लेकर भी सवाल खड़े हो गए है।
हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार नही बनाए जाने के अलावा कुरियन और रवनीत सिंह बिट्टू से जुड़े घटनाक्रम ने भी मंत्रिपरिषद में बदलाव की अटकलों को मजबूत किया है। हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से अभी कैबिनेट फेरबदल की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नही की गई है।
UP की राज्यसभा सूची ने बढ़ाई हलचल
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए है। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को मैदान में उतारा है।
इस सूची की सबसे खास बात यह है कि भाजपा ने मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा मौका देने के बजाय नए चेहरों पर दांव लगाया है। इसी वजह से केंद्र की राजनीति में भी संभावित बदलाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
हरदीप पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नही
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को पूरा होना है। दोनों नेताओं को इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार नही बनाया गया है।
चूंकि दोनों नेता केंद्र सरकार में मंत्री पद पर है और उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने वाला है, इसलिए अब उनके भविष्य को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज है। हालांकि, केवल राज्यसभा टिकट नही मिलने के आधार पर किसी मंत्री के पद से हटने की पुष्टि नही की जा सकती।
कैबिनेट में नए चेहरों के लिए रास्ता खुला
मोदी सरकार के संभावित फेरबदल की चर्चा सिर्फ मौजूदा मंत्रियों तक सीमित नही है। मंत्रिपरिषद में नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। केंद्रीय मंत्रिपरिषद की संवैधानिक अधिकतम सीमा 81 सदस्य है और मौजूदा संख्या इस सीमा से कम बताई जाती है।
इसका मतलब यह है कि सरकार के पास नए नेताओं को मंत्री बनाने के लिए गुंजाइश मौजूद है। ऐसे में संगठन में सक्रिय नेताओं, राज्यों में मजबूत पकड़ रखने वाले चेहरों और आगामी चुनावी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण नेताओं को केंद्र में जगह मिलने की संभावना पर नजर बनी हुई है।
पहले भी राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने पर बदली भूमिका
मोदी सरकार में पहले भी ऐसे मामले सामने आए है, जब किसी मंत्री का राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका बदली गई। इसी वजह से मौजूदा घटनाक्रम को भी केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित करके नही देखा जा रहा है।
हालांकि, अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व को करना है। राज्यसभा के नतीजों, संगठन की जरूरत और आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है।
किसे मिलेगी जगह, अभी बना हुआ है सस्पेंस
संभावित फेरबदल में किन नेताओं को हटाया जाएगा और किन नए चेहरों को केंद्र सरकार में शामिल किया जाएगा, इस पर अभी आधिकारिक तस्वीर साफ नही है। राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अटकलों का दौर जरूर तेज हो गया है, लेकिन सरकार की ओर से किसी नाम या तारीख की पुष्टि नही की गई है।
ऐसे में अब सबकी नजर दिल्ली पर है। यदि कैबिनेट फेरबदल होता है, तो इसमें क्षेत्रीय संतुलन के साथ संगठन और आगामी चुनावों की जरूरत को भी खास महत्व मिलने की संभावना है।

