भुवनेश्वर। कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की ओर से 8 अक्टूबर को बुलाए गए ओडिशा बंद के बीच निजी बस यात्रियों के लिए राहत की खबर है। ओडिशा प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि बंद के समर्थन में बस सेवाएं रोकने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। मौजूदा योजना के मुताबिक निजी बसें अपने निर्धारित रूट पर सामान्य रूप से चलेंगी।
बस एसोसिएशन ने साफ किया रुख
एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रियब्रत त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक किसी राजनीतिक दल या संगठन ने बस मालिकों या एसोसिएशन से बंद के समर्थन में सेवाएं रोकने को लेकर संपर्क नहीं किया है। ऐसे में बस संचालन बंद करने का सवाल ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा कि फिलहाल फैसला यही है कि 8 अक्टूबर को निजी बस सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
रोजाना सफर करने वालों को मिली राहत
बसों के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने से नौकरी, पढाई, कारोबार और दूसरे जरूरी कामों के लिए रोज यात्रा करने वाले लोगों की चिंता कम हुई है। खासकर दूसरे जिलों या दूरदराज के इलाकों में जाने वाले यात्रियों के लिए निजी बसें परिवहन का अहम साधन हैं।
हालांकि एसोसिएशन ने यह भी संकेत दिया है कि किसी इलाके में प्रदर्शन, सड़क जाम या कानून व्यवस्था की स्थिति बिगडती है तो वहां स्थानीय स्तर पर बसों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
किन मुद्दों पर बुलाया गया है बंद
INDIA गठबंधन ने MMDR संशोधन कानून, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से जुडे विवाद सहित कई मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है।
कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि बंद शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा। वहीं गठबंधन की ओर से खनन क्षेत्रों में आर्थिक नाकेबंदी और विरोध कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई है।
MMDR कानून को लेकर सियासी टकराव
बंद के प्रमुख मुद्दों में MMDR संशोधन कानून भी शामिल है। कांग्रेस का आरोप है कि खनन कानून में किए गए बदलावों से ओडिशा के खनिज और आर्थिक हित प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सत्तारूढ पक्ष विपक्ष के इन आरोपों से सहमत नहीं है।
इसी मुद्दे को लेकर राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और INDIA गठबंधन बंद के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
सड़क जाम हुआ तो बसों पर पड सकता है असर
एसोसिएशन की ओर से सेवाएं जारी रखने का फैसला पूरे राज्य में बसों के निर्बाध संचालन की गारंटी नहीं है। यदि किसी मार्ग पर प्रदर्शनकारी सड़क रोकते हैं या चक्का जाम की स्थिति बनती है, तो बसों को कुछ समय के लिए रोकना पड सकता है।
बस चालक और ऑपरेटर ऐसी स्थिति में यात्रियों और वाहन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फैसला ले सकते हैं।
पुलिस के सामने भी बडी चुनौती
बंद के दौरान प्रशासन के सामने प्रदर्शन के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने और आम लोगों की आवाजाही सुचारु रखने की चुनौती होगी। बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बाजार क्षेत्रों और प्रमुख सडकों पर सुरक्षा व्यवस्था बढाई जा सकती है।
दूरदराज के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी बसों पर निर्भरता अधिक होने के कारण वहां किसी तरह की बाधा का सीधा असर आम यात्रियों पर पड सकता है।
पहले भी प्रभावित हो चुकी हैं बस सेवाएं
इससे पहले 30 सितंबर को हुए एक अन्य बंद के दौरान कई निजी बसें सुबह सड़कों पर नहीं उतरी थीं। बाद में हालात सामान्य होने पर दोपहर से बस सेवाएं दोबारा शुरू की गई थीं। इस बार बस एसोसिएशन ने पहले ही संचालन जारी रखने का फैसला स्पष्ट कर दिया है।
फिलहाल बसें चलेंगी, लेकिन हालात पर रहेगी नजर
8 अक्टूबर को निजी बस सेवाओं को लेकर फिलहाल तस्वीर साफ है। एसोसिएशन ने सामूहिक हड़ताल या बस संचालन बंद करने का कोई आह्वान नहीं किया है। इसलिए निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बसें चलाने की तैयारी है।
हालांकि यात्रियों के लिए बेहतर होगा कि सफर से पहले संबंधित बस ऑपरेटर या स्थानीय बस स्टैंड से अपने रूट की स्थिति की जानकारी ले लें। क्योंकि किसी इलाके में विरोध प्रदर्शन या सड़क अवरोध की स्थिति बनने पर बसों के समय और रूट में अस्थायी बदलाव संभव है।

