शिवपुरी। नवरात्रि उत्सव से पहले शिवपुरी में गरबा आयोजनों की व्यवस्था को लेकर विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने जिला प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। दोनों संगठनों ने संयुक्त आवेदन देकर गरबा पंडालों में प्रवेश व्यवस्था, संगीत और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की मांग की है।
गरबा पंडाल में एंट्री से पहले पहचान की जांच की मांग
VHP और बजरंग दल ने गरबा कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए आधार कार्ड या अन्य वैध पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य करने की मांग की है। संगठनों का कहना है कि पहचान सत्यापन से आयोजन स्थल पर आने वाले लोगों की जानकारी रखने में मदद मिलेगी और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।
संगठनों ने आयोजन समितियों को प्रवेश द्वार पर पर्याप्त स्वयंसेवक और सुरक्षा कर्मी तैनात करने का सुझाव भी दिया है।
केवल धार्मिक और पारंपरिक संगीत बजाने की मांग
संयुक्त आवेदन में गरबा पंडालों में बजने वाले गीतों को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। संगठनों ने मांग की है कि कार्यक्रम में माता के भजन, धार्मिक गीत और पारंपरिक गरबा संगीत को प्राथमिकता दी जाए।
उनका कहना है कि अश्लील या आपत्तिजनक गीत नवरात्रि के धार्मिक माहौल के अनुरूप नहीं हैं, इसलिए ऐसे गानों पर रोक लगाई जानी चाहिए।
नशे में पहुंचने वालों को प्रवेश न देने की मांग
संगठनों ने यह भी कहा है कि शराब या किसी अन्य नशे के प्रभाव में आने वाले लोगों को गरबा पंडाल में प्रवेश नहीं दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि नशे की हालत में पहुंचने वाले लोगों से कार्यक्रम में अव्यवस्था और सुरक्षा संबंधी परेशानी पैदा हो सकती है।
इसके लिए आयोजकों को जरूरत पडने पर पुलिस की सहायता लेने की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
सिर्फ सनातनी भक्तों की एंट्री की मांग पर चर्चा
संयुक्त आवेदन के बाद एक मांग ने खास तौर पर चर्चा खींची है। संगठनों की ओर से गरबा कार्यक्रमों में केवल सनातनी भक्तों को प्रवेश देने की बात कही गई है।
हालांकि इस तरह की मांग पर अंतिम फैसला जिला प्रशासन और आयोजन समितियों को लागू कानून और प्रशासनिक नियमों के आधार पर करना होगा। फिलहाल इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
भीड़ नियंत्रण के लिए भी दिए सुझाव
नवरात्रि के दौरान गरबा कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में संगठनों ने प्रशासन से आयोजकों को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
प्रवेश और निकास के लिए अलग रास्ते, सुरक्षा जांच, पर्याप्त रोशनी और आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है।
महिलाओं की सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस
गरबा कार्यक्रमों में महिलाओं और युवतियों की बड़ी संख्या में भागीदारी रहती है। ऐसे में आयोजन स्थलों पर पुलिस गश्त, CCTV कैमरे और पर्याप्त सुरक्षा बल की मौजूदगी अहम होगी।
इसके अलावा बडे आयोजनों में आग से बचाव, पार्किंग और आपात चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं को भी पहले से सुनिश्चित करने की जरूरत होगी।
पहचान जांच लागू हुई तो बढ सकती है प्रवेश की चुनौती
अगर प्रशासन पहचान पत्र की जांच को मंजूरी देता है, तो आयोजन स्थलों पर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर आयोजकों को अतिरिक्त तैयारी करनी होगी। भीड़ अधिक होने पर प्रवेश में देरी की स्थिति बन सकती है।
ऐसे में आयोजक पूर्व पंजीयन या पास जैसी व्यवस्थाओं पर विचार कर सकते हैं, हालांकि अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक व्यवस्था तय नहीं हुई है।
अब प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
VHP और बजरंग दल की ओर से संयुक्त आवेदन सौंपे जाने के बाद अब निगाह जिला प्रशासन के अगले कदम पर है। प्रशासन पुलिस और गरबा आयोजन समितियों के साथ बैठक कर सुरक्षा, प्रवेश और कार्यक्रम से जुड़े नियम तय कर सकता है।
फिलहाल संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य गरबा आयोजनों को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप, अनुशासित और सुरक्षित रखना है। नवरात्रि से पहले इन मांगों पर प्रशासन क्या फैसला करता है, यह देखना अहम होगा।

