अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले करीब 200 कृषि और खाद्य उत्पादों पर टैरिफ में राहत दी है। इस फैसले से भारतीय मसाले, चाय, मेवे और कई प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के निर्यातकों को बड़ा फ़ायदा मिलने वाला है। अमेरिकी बाज़ार में भारतीय उत्पादों की मांग पहले से ही तेज़ है और टैरिफ कम होने से इनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता और बढ़ जाएगी।
क्यों आया टैरिफ राहत का फैसला?
ट्रंप प्रशासन पर पिछले कुछ महीनों से महंगाई और घरेलू उपभोक्ताओं की नाराजगी का भारी दबाव था। खाद्य उत्पादों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से अमेरिकी उपभोक्ता परेशान थे। विशेषज्ञों के अनुसार, दबाव कम करने और घरेलू मोर्चे पर सकारात्मक संदेश देने के लिए ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ कम करने का फैसला लिया।
भारत को होने वाला सीधा फायदा
भारतीय चाय और मसाले के निर्यातकों ने इस कदम का स्वागत किया है। अनुमान है कि इस राहत से 1 बिलियन डॉलर से अधिक भारतीय कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। अमेरिका भारतीय मसालों और चाय का बड़ा उपभोक्ता है, इसलिए यह फैसला भारतीय व्यापारियों के लिए अच्छी खबर है।
कौन-कौन से सेक्टर को मिली राहत?
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मसाले (जीरा, हल्दी, मिर्च)
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चाय
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सूखे मेवे
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कई पैक्ड/प्रोसेस्ड फूड आइटम
लेकिन कुछ बड़े उद्योग अभी भी निराश
हालांकि राहत सीमित है। कुछ प्रमुख सेक्टर—जैसे सीफूड, बासमती चावल और कुछ कृषि उत्पाद—अभी भी टैरिफ की मार झेल रहे हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को पूर्ण राहत पाने के लिए अमेरिका से और वार्ता करनी होगी।
राजनीतिक संकेत क्या हैं?
चुनाव नज़दीक होने के कारण ट्रंप का यह कदम राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वे घरेलू उपभोक्ताओं को यह मैसेज देना चाहते हैं कि वे महंगाई कम करने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। साथ ही भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत रखने का भी संदेश है।
निर्यातकों को उम्मीद—राहत आगे और बढ़ सकती है
भारतीय व्यापार संगठनों का कहना है कि यह कदम दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता में सुधार का संकेत देता है। उम्मीद है कि आगे और उत्पादों पर भी राहत मिल सकती है।