दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में मिठाइयों की दुकानें सजने लगी है। रसगुल्ले, रसमलाई, लड्डू और इमरती जैसी मिठाइयों के बीच एक ऐसी पारंपरिक मिठाई भी है, जिसका इतिहास मुगलकाल से जोड़ा जाता है। इसका नाम है सोहन हलवा। मान्यता है कि बादशाह अकबर के समय में भी यह मिठाई काफी लोकप्रिय थी। खास बात यह है कि आज भी इसके चाहने वालों की कमी नहीं है।
सोहन हलवा: लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाली मिठाई
सोहन हलवा पारंपरिक मिठाइयों में अपनी अलग पहचान रखता है। इसे बनाने में देसी घी, अंकुरित गेहूं से तैयार आटा और चीनी का इस्तेमाल किया जाता है। सामग्री को लंबे समय तक पकाने और लगातार चलाने की प्रक्रिया से इसका खास स्वाद और बनावट तैयार होती है।
इस मिठाई को लेकर प्रचलित मान्यता है कि बादशाह अकबर जब अपने बड़े सैन्य दल के साथ लंबी यात्राओं या अभियानों पर निकलते थे, तब ऐसे खाद्य पदार्थ साथ रखे जाते थे, जो लंबे समय तक खराब न हों। कहा जाता है कि सोहन हलवा भी इसी तरह के खाद्य पदार्थों में शामिल था।
अकबर के समय से जुड़ी है लोकप्रियता की कहानी
किस्सों के अनुसार, लंबी यात्राओं के दौरान अकबर अपने और सैनिकों के लिए कई महीनों तक चलने वाली खाद्य सामग्री साथ रखते थे। सोहन हलवे को भी इसी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस ऐतिहासिक दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
आज अजमेर आने वाले कई जायरीन ख्वाजा की दरगाह पर जियारत के बाद सोहन हलवा तबर्रुक यानी प्रसाद या आशीर्वाद के तौर पर अपने साथ ले जाते है। इस वजह से भी यह मिठाई खास पहचान रखती है।
देसी घी, अंकुरित गेहूं और मेवे से तैयार होता है सोहन हलवा
सोहन हलवा बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया में समय और मेहनत दोनों लगते है। इसकी तैयारी के लिए अंकुरित गेहूं को पहले सुखाया जाता है और फिर पीसकर आटा तैयार किया जाता है। इसके बाद आटे में घी, चीनी और जरूरत के अनुसार अन्य सामग्री मिलाकर लगातार पकाया जाता है।
आजकल स्वाद और सजावट के लिए हलवाई इसमें बादाम, काजू और दूसरे सूखे मेवे भी मिलाते है। अच्छी तरह पकने के बाद हलवे को जमाया जाता है और फिर टुकड़ों में काटकर परोसा जाता है।
घर पर सोहन हलवा बनाने के लिए क्या करें?
घर पर इसका सरल रूप बनाने के लिए मैदा या गेहूं के आटे, घी, चीनी, दूध और पसंदीदा सूखे मेवों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
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सबसे पहले मोटे तले वाली कड़ाही में घी गर्म करें।
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इसमें आटा डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनें।
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अलग बर्तन में चीनी और पानी की चाशनी तैयार करें।
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भुने हुए आटे में सावधानी से चाशनी मिलाएं और लगातार चलाते रहे, ताकि गांठें न बनें।
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मिश्रण गाढ़ा होने पर कटे हुए सूखे मेवे डालें।
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तैयार मिश्रण को घी लगी थाली में फैलाकर ठंडा होने दें। जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें।
ध्यान रहे कि यह घर पर बनाने का एक सरल तरीका है। पारंपरिक सोहन हलवे की बनावट और स्वाद के लिए अंकुरित गेहूं से तैयार आटे तथा पकाने की विशेष प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।
दिवाली पर अगर आप सामान्य मिठाइयों से अलग कुछ चखना चाहते है, तो सोहन हलवा एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसका पारंपरिक स्वाद और इससे जुड़ी ऐतिहासिक मान्यताएं इसे त्योहारों के मौके पर खास बनाती है।

