नई दिल्ली: धनतेरस और दिवाली के त्योहार पर सोने-चांदी की खरीदारी करने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले ही सर्राफा बाजार में दोनों कीमती धातुओं के भाव में तेज गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक रुख का असर घरेलू वायदा बाजार पर साफ नजर आया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई। खासतौर पर चांदी की कीमत एक कारोबारी सत्र में 4,000 रुपये से अधिक नीचे आ गई।
MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट
घरेलू वायदा बाजार में गुरुवार को सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा। दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना 911 रुपये यानी 0.63 फीसदी की गिरावट के साथ 1,41,685 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद के कारोबार में इसमें हल्की रिकवरी आई और भाव करीब 1,41,800 रुपये के आसपास पहुंच गया।
चांदी की कीमतों में इससे भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। वायदा कारोबार में चांदी 2.26 फीसदी यानी 4,282 रुपये सस्ती होकर 1,85,171 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। बाजार में आई इस गिरावट से उन खरीदारों को राहत मिल सकती है, जो धनतेरस और दिवाली पर आभूषण, चांदी के बर्तन और सिक्के खरीदने का इंतजार कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कमजोर पड़े भाव
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का असर वैश्विक बाजार में भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना करीब 0.7 फीसदी टूटकर 3,991 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, चांदी का भाव 1.6 फीसदी गिरकर 51.27 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता नजर आया।
अमेरिकी फेड के सख्त रुख से निवेशकों की चिंता बढ़ी
कीमती धातुओं की कीमतों में आई इस कमजोरी के पीछे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति को प्रमुख वजह माना जा रहा है। फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया बैठक में ब्याज दरों को 3.75 से 4 फीसदी के दायरे में बरकरार रखा। इसके साथ ही फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई को लेकर चिंता जाहिर करते हुए संकेत दिया कि कीमतों का दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
नीतिगत फैसले के दौरान दो सदस्यों ने ब्याज दरों में तत्काल बढ़ोतरी के समर्थन में मतदान भी किया। इससे बाजार में यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं।
सोने-चांदी की कीमतों पर क्यों पड़ता है ब्याज दरों का असर?
जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेत देता है, तो निवेशकों के लिए ब्याज देने वाले विकल्प आकर्षक हो जाते हैं। इसके मुकाबले सोना और चांदी जैसे ऐसे निवेश, जिनसे नियमित ब्याज नहीं मिलता, कम आकर्षक नजर आने लगते हैं। यही वजह है कि सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिलने पर कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
धनतेरस और दिवाली से ठीक पहले आई इस गिरावट ने खरीदारों को राहत जरूर दी है, लेकिन बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। ऐसे में खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी के ताजा भाव जरूर जांच लें।

