उत्तर प्रदेश : विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज करने की रणनीति बनाई है। पार्टी का मकसद प्रदेश में संगठन को फिर से मजबूत करना और खोए हुए राजनीतिक आधार को वापस हासिल करना है। इस पूरी कवायद में प्रियंका गांधी की भूमिका अहम हो सकती है। कांग्रेस उनके नेतृत्व में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ समाजवादी पार्टी से गठबंधन और सीटों के बंटवारे पर भी बातचीत आगे बढ़ाने की तैयारी में है।प्रियंका गांधी की जिम्मेदारी केवल चुनावी सभाओं और प्रचार तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। संगठनात्मक तैयारियों के साथ गठबंधन की रणनीति तय करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी हो सकती है।
चार समितियों के सहारे चुनावी रणनीति तैयार करेगी कांग्रेस
मिशन 2027 को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने चार प्रमुख समितियां गठित करने की योजना बनाई है। इनमें चुनाव प्रबंधन, घोषणापत्र, प्रचार और गठबंधन समन्वय से संबंधित समितियां शामिल होंगी।इन समितियों के लिए नेताओं के नामों पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित सूची पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पास भेजी जाएगी। संभावना है कि दिवाली के बाद समितियों के गठन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।प्रियंका गांधी ने यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा भी की है।
सपा के साथ सीटों का बंटवारा बनेगा बड़ी चुनौती
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की संभावनाएं बरकरार हैं, लेकिन दोनों दलों के सामने सीटों का तालमेल सबसे अहम मुद्दा है। कांग्रेस उत्तर प्रदेश में 125 से अधिक विधानसभा सीटों पर अपनी दावेदारी पेश करना चाहती है।पार्टी का आधार 2024 के लोकसभा चुनाव में मिले प्रदर्शन और प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर हासिल बढ़त को बताया जा रहा है। दूसरी ओर, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी अधिक सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारना चाहेंगे। ऐसे में दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
अखिलेश यादव से सीधे बातचीत कर सकती हैं प्रियंका
गठबंधन के मामले में प्रियंका गांधी को अहम जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों को लेकर कांग्रेस और सपा के बीच बनी असहमति दूर करने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। इसी अनुभव को देखते हुए 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव के साथ बातचीत का जिम्मा भी उन्हें मिल सकता है।इसके अलावा कांग्रेस प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी जनसभाएं आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इन कार्यक्रमों में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी शामिल हो सकते हैं। पार्टी की कोशिश चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने और सपा के साथ गठबंधन को मजबूत आधार देने की है।
सीटों पर सहमति बनाना दोनों दलों के लिए अहम
कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर लंबे समय से अलग-अलग चर्चाएं सामने आती रही हैं। राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस कम सीटों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं है। वहीं, समाजवादी पार्टी भी अपनी चुनावी रणनीति और सीटों को लेकर अलग रुख रख सकती है।ऐसे में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव के बीच संभावित बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच सहमति बनने पर ही गठबंधन की आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।
भाजपा की भी गठबंधन की बातचीत पर नजर
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच चल रही राजनीतिक गतिविधियों पर भाजपा भी नजर रख रही है। भाजपा इस मुद्दे को चुनावी प्रचार में उठाकर दोनों दलों के बीच सीटों को लेकर मतभेदों को जनता के सामने रखने की रणनीति अपना सकती है।फिलहाल कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है। उसे एक ओर प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करना है, तो दूसरी ओर सपा के साथ सीटों का ऐसा समझौता करना है, जिस पर दोनों दल सहमत हो सकें।

