हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वैश्विक जनसांख्यिकीय बदलाव विकास की दिशा और गति को प्रभावित कर रहे हैं। युवा आबादी वाले देशों, विशेषकर भारत जैसे देशों, को इस परिवर्तन से महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक लाभ मिलने की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्व के कई विकसित देश बढ़ती वृद्ध आबादी और घटती जन्म दर से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनकी कार्य शक्ति में कमी और सामाजिक सुरक्षा खर्च में वृद्धि जैसी चुनौतियां सामने आएंगी। इसके विपरीत भारत में युवा जनसंख्या की बड़ी संख्या रोजगार, उत्पादन और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को डेमोग्राफिक डिविडेंड का पूरा लाभ उठाने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। इससे न केवल रोजगार सृजन होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि युवा आबादी वाले देशों के लिए टेक्नोलॉजी और डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश करना महत्वपूर्ण होगा। सही नीतियों के जरिए भारत वैश्विक उत्पादन और सेवाओं में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
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इस बदलाव से यह संकेत मिलता है कि आने वाले दशकों में वैश्विक विकास का केंद्र उन देशों की ओर रहेगा, जहां युवा शक्ति और नवाचार की क्षमता मजबूत होगी। ऐसे में भारत के लिए यह समय न केवल अवसर का है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को मजबूत करने का सुनहरा मौका भी है।