सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को रेगुलेट करने को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बड़ा सहारा दिया है। अदालत ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैलाई जाने वाली फेक न्यूज, हेट स्पीच और गलत जानकारी को रोकने के लिए सरकार कानूनी दायरे में उपयुक्त नियम बना सकती है। कोर्ट का यह कदम सरकार को सोशल मीडिया पर बढ़ते दुरुपयोग को नियंत्रित करने का मजबूत आधार देता है।
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि सोशल मीडिया की अनियंत्रित गतिविधियों से समाज में नफरत और अस्थिरता फैल सकती है, इसलिए प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय होना जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि बिना किसी नियम के सोशल मीडिया कंपनियों को मनमर्जी से काम करने देना सार्वजनिक हित में नहीं है। कोर्ट का यह बयान सरकार को नए और सख्त दिशानिर्देश लाने की दिशा में एक ‘कानूनी हथियार’ प्रदान करता है।
इसी के साथ केंद्र सरकार अब हानिकारक कंटेंट, फेक न्यूज और गलत जानकारी फैलाने वाले अकाउंट्स पर सख्ती करने के लिए नए नियमों पर विचार कर सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह फैसला सोशल मीडिया कंपनियों की निगरानी को मजबूत करेगा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अधिक जिम्मेदार बनाएगा। वहीं, सरकार के संकेत मिल रहे हैं कि डिजिटल सुरक्षा और यूजर प्रोटेक्शन को बढ़ाने के लिए जल्द ही नए रेगुलेशन लागू किए जा सकते हैं।