देश में गोल्ड लोन (Gold Loan) की मांग में भारी उछाल देखा जा रहा है। हालिया बैंकों और वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड लोन में 128.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर यह हुआ कि लोग अपने निजी सोने को गिरवी रखकर नकदी की आवश्यकता पूरी कर रहे हैं।अधिकतर छोटे और मध्यम व्यवसायी, किसान और दैनिक खर्चों के लिए तंग पड़े घर-गृहस्थ लोग अब अपने जेवरात और सोने की चेन गिरवी रखकर तत्काल वित्तीय मदद ले रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कुछ महीनों में कई कारकों के कारण यह उछाल आया है:महंगाई और दैनिक खर्च में वृद्धि — घरेलू खर्च, ईंधन और खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ी कीमतें। व्यापारिक नकदी की कमी — छोटे और मध्यम व्यवसायों को अल्पकालिक पूंजी की जरूरत। बैंकिंग लोन तक आसान पहुंच नहीं — कई लोगों के लिए सोना गिरवी रखना आसान और तेज विकल्प बन गया। सस्ता ब्याज दर वाला विकल्प — गोल्ड लोन की ब्याज दर अन्य शॉर्ट-टर्म लोन की तुलना में कम और लचीली होती है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष गोल्ड लोन की कुल रकम लगभग दुगनी से ज्यादा बढ़ गई है। इसका मतलब यह है कि सामान्य परिवार और व्यापारी अब अपनी नकदी जरूरतों के लिए अधिक भरोसा गोल्ड लोन पर कर रहे हैं।गोल्ड लोन में आमतौर पर मासिक या लोन अवधि के अंत में ब्याज चुकाना होता है। समय पर भुगतान न करने पर गिरवी रखे गए सोने पर कब्जा बैंक को हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोन लेने से पहले ब्याज दर, अवधि और पुनर्भुगतान की योजना साफ-साफ तय करें।
गोल्ड लोन की बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि घरेलू आर्थिक दबाव बढ़ा है। हालांकि वित्तीय संस्थान इसका लाभ उठा रहे हैं, आम जनता को योजना और सतर्कता से ही इसका उपयोग करना चाहिए।