बिहार की राजधानी पटना से एक दर्दनाक खबर सामने आई है, जहां लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं जब एक व्रती महिला का बेटा तालाब में डूब गया। यह हादसा छठ पूजा के अंतिम दिन, उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद सफाई के दौरान हुआ।
छठ घाटों पर जहां सुबह-सुबह लाखों श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन कर रहे थे, वहीं इस हादसे ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।
कैसे हुआ हादसा
घटना पटना के दीघा थाना क्षेत्र स्थित स्थानीय छठ घाट की है। बताया जा रहा है कि छठ पूजा का अंतिम दिन यानी उषा अर्घ्य देने के बाद श्रद्धालु घर लौट रहे थे। व्रती महिला पूजा के बाद घाट की सफाई कर रही थीं, तभी उनका लगभग 12 वर्षीय बेटा तालाब के किनारे खेलते-खेलते फिसलकर पानी में गिर गया।
स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाया और बच्चे को बचाने की कोशिश की, लेकिन गहराई ज्यादा होने की वजह से वे सफल नहीं हो सके। बाद में गोताखोरों की मदद से बच्चे का शव बाहर निकाला गया।
मौके पर अफरा-तफरी, लोगों में गुस्सा
जैसे ही यह खबर फैली, मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। कई लोगों ने प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और गोताखोरों की तैनाती नहीं की गई थी।
स्थानीय निवासी रवि कुमार ने बताया,
“हर साल छठ पर यहां भीड़ होती है, लेकिन इस बार सुरक्षा के नाम पर सिर्फ दिखावा किया गया। अगर समय रहते गोताखोर मौजूद होते तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी।”
प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
घटना की जानकारी मिलते ही पटना जिलाधिकारी (DM) और नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पटना DM ने मीडिया से बातचीत में कहा —
यह बेहद दुखद घटना है। हम पीड़ित परिवार के साथ हैं। जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और परिवार को आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।”
छठ पर्व की रौनक में छाया सन्नाटा
जिस घाट पर यह हादसा हुआ, वहां सुबह तक पूजा-पाठ और गीतों की गूंज थी। “कांच ही बांस के बहंगिया” जैसे छठ गीतों की जगह अब मातम और सन्नाटा छा गया। लोग उस परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं, जिसकी खुशियां कुछ ही पलों में मातम में बदल गईं।
छठ पर्व को लोक आस्था का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है, लेकिन हर साल बिहार और अन्य राज्यों में ऐसे हादसे लोगों की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पटना के कई घाटों पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में पर्याप्त सुरक्षा, रोशनी और बैरिकेडिंग की जरूरत होती है। लेकिन इस बार कई स्थानों पर सुरक्षा इंतजाम अधूरे रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हादसों से बचने के लिए हर घाट पर स्थायी निगरानी व्यवस्था, लाइफ जैकेट, और प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती जरूरी है।