अयोध्या : राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। पुलिस अब उन आरोपों की भी जांच कर रही है, जिनमें मंदिर में नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने का दावा किया गया है। इसके चलते मंदिर में हुई नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है।
चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपी जेल भेजे गए
चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। सभी आरोपियों को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की, जहां से नकदी और अन्य कीमती सामान बरामद होने की बात सामने आई है। बरामद सामग्री के आधार पर पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
एक आरोपी से मिले इनपुट के बाद जांच की दिशा बदली
जांच के दौरान आरोपी अविनाश शुक्ला से पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां सामने आईं। सूत्रों के अनुसार उसने ट्रस्ट के एक सदस्य का कई बार जिक्र किया, जिसके बाद पुलिस ने उस पहलू की भी जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही मंदिर में हुई नियुक्तियों और उनसे जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है।
125 नियुक्तियों में पैसों के लेनदेन का दावा
जांच में यह दावा सामने आया है कि मंदिर में विभिन्न पदों पर करीब 125 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी। आरोप है कि इनमें से कई लोगों से नौकरी दिलाने के बदले धनराशि ली गई। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इसकी सत्यता की जांच कर रही है।
भर्ती प्रक्रिया और संभावित नेटवर्क की जांच तेज
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यदि भर्ती में अनियमितता हुई है तो इसके पीछे कुछ व्यक्तियों की भूमिका थी या फिर कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि नियुक्तियां किसके निर्देश पर, किन मानकों के आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत की गई थीं। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

