लोकप्रिय टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ एक बार फिर नए मोड़ के साथ दर्शकों के बीच लौट रहा है। शो में 10 साल का लीप दिखाया जाएगा, जिसके साथ कहानी का नया अध्याय शुरू होगा। इस खास मौके पर शो की मुख्य किरदार ‘तुलसी’ का चेहरा रहीं स्मृति ईरानी ने अपने अनुभव साझा किए और बताया कि यह किरदार आज भी लोगों के दिलों में क्यों बसा हुआ है।
‘लोगों ने मुझे अपनी मां और दादी की याद बताया’
स्मृति ईरानी ने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान तब होता है, जब लोग बताते हैं कि ‘तुलसी’ का किरदार उन्हें अपनी मां, दादी या नानी की याद दिलाता है। उनके अनुसार, यही इस किरदार की सबसे बड़ी सफलता है, क्योंकि हर परिवार में ऐसा कोई व्यक्ति होना चाहिए जो रिश्तों को जोड़ने, लोगों की बात सुनने और परिवार को साथ रखने का काम करे।
10 साल बाद नई चुनौतियों के साथ लौटेगी तुलसी
स्मृति ने बताया कि नए अध्याय में 10 साल बाद तुलसी अपने परिवार के बीच लौटेगी। इस दौरान परिवार, रिश्ते और हालात काफी बदल चुके होंगे। दूरियां बढ़ चुकी हैं और कई नए संघर्ष सामने आएंगे, लेकिन तुलसी का विश्वास अब भी वही रहेगा कि हर रिश्ते को दूसरा मौका मिलना चाहिए और परिवार को फिर से एकजुट किया जा सकता है।
हर पीढ़ी की अपनी चुनौतियां होती हैं
अपने किरदार के बारे में बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा कि उन्हें तुलसी की सबसे खास बात हमेशा यही लगी कि उसने कभी किसी समस्या का सिर्फ एक ही समाधान नहीं माना। बदलते समय के साथ हर पीढ़ी नई चुनौतियां लेकर आती है और उनका सामना समझदारी, संवेदनशीलता और धैर्य के साथ करना जरूरी होता है।
परिवार, माफी और उम्मीद की कहानी
स्मृति ने कहा कि तुलसी का सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। नए अध्याय में भी दर्शकों को कई अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिलेंगे, लेकिन कहानी का मूल भाव परिवार, माफी और उम्मीद ही रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दर्शक एक बार फिर तुलसी की कहानी में अपनी जिंदगी की झलक देख पाएंगे और इस नए सफर से जुड़ाव महसूस करेंगे।

