अयोध्या। राम मंदिर में दानपात्रों और गणना कक्ष से चढ़ावे की कथित राशि गायब होने के मामले ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर हलचल बढ़ा दी है। मामले को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास महाराज ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
महंत ने जताई कड़ी नाराजगी
महंत दिनेंद्र दास महाराज ने कहा कि भगवान के मंदिर में चढ़ावे की चोरी अत्यंत गंभीर अपराध है और इसमें शामिल लोगों के प्रति किसी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग की और कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
जांच तेज, एसआईटी को मिला सेवा विस्तार
मामले की जांच में जुटी एजेंसियों ने कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य सरकार ने जांच को आगे बढ़ाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का कार्यकाल 15 दिन के लिए बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क का पता लगाने और मामले से जुड़े सभी तथ्यों को सामने लाने में जुटी हैं।इधर, मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस ने कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस मंदिर परिसर में घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने और कथित रूप से चोरी गई नकदी व अन्य सामान की बरामदगी के प्रयास कर रही है।
प्रशासन की कार्रवाई पर जताया भरोसा
महंत दिनेंद्र दास महाराज ने अब तक की कार्रवाई पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम कर रही हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि मामले में शामिल सभी लोगों की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी प्रकार का गबन हुआ है तो उसकी पूरी वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।
मामले पर सियासत भी तेज
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे ने घटना को गंभीर बताते हुए मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि इतने सुरक्षित परिसर में ऐसी घटना हो सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।वहीं शिवसेना नेता शाइना एनसी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि किसी भी अनियमितता की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए, लेकिन धार्मिक आस्था के केंद्रों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय प्रक्रियाएं नियमानुसार संचालित होती हैं और जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा।

