रायपुर। छत्तीसगढ़ की महान लोक कलाकार और पद्म विभूषण से सम्मानित पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय रायपुर एम्स पहुंचे। उन्होंने दिवंगत कलाकार को श्रद्धासुमन अर्पित किए और शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई का जाना छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी क्षति है।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया गहरा दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा कि उनके निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की पंडवानी लोककला को वैश्विक पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है तथा उन्होंने शोक संतप्त परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी तीजन बाई के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने अपनी गायकी से भारतीय लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया। उन्होंने इसे कला और संगीत जगत की अपूरणीय क्षति बताया।
70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस
तीजन बाई लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रायपुर एम्स में उनका उपचार चल रहा था। रविवार को 70 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर के बाद पूरे देश में कला, साहित्य और संस्कृति जगत से जुड़े लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया।
पंडवानी को दिलाई विश्वस्तरीय पहचान
वर्ष 1956 में भिलाई के समीप गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने पंडवानी लोककला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को गायन, अभिनय और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने देश और विदेश के मंचों पर लोकप्रिय बनाया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्वभर में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
भारतीय लोककला में अतुलनीय योगदान के लिए तीजन बाई को वर्ष 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए। उनकी कला और विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

