रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होगा। सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधायकों ने अब तक कुल 1033 प्रश्न लगाए हैं, जबकि प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। माना जा रहा है कि इस बार सदन में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बिजली-पानी, भूमि विवाद और मानसून से जुड़े मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिलेगी।
कानून-व्यवस्था पर सरकार से मांगे जाएंगे जवाब
मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में विपक्ष का सबसे बड़ा निशाना प्रदेश की कानून-व्यवस्था रहेगी। हाल के दिनों में हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और नशे के मामलों को लेकर कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करने की तैयारी में है। विपक्ष का आरोप है कि प्रदेश में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
किसानों की समस्याएं भी रहेंगी केंद्र में
खरीफ सीजन के बीच किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश के किसान कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं और इन मुद्दों को सदन में मजबूती से उठाया जाएगा।
नकटी भूमि विवाद पर भी हो सकती है तीखी बहस
रायपुर के नकटी गांव में भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और प्रस्तावित विधायक कॉलोनी को लेकर चल रहा विवाद भी विधानसभा में गूंज सकता है। इस मामले पर सत्ता पक्ष के सांसद द्वारा भी सवाल उठाए जाने के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के बड़े मुद्दे के रूप में पेश कर सकता है।
बिजली, पानी और मानसून के हालात पर भी होगी चर्चा
ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती, पेयजल संकट, स्कूलों से जुड़े फैसले, मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की स्थिति तथा राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर भी सरकार से जवाब तलब किया जाएगा। हाल की भारी बारिश और आपदा प्रबंधन की तैयारियां भी सदन में चर्चा का प्रमुख विषय बन सकती हैं।
पांच दिन का सत्र, लेकिन सियासी तापमान रहेगा हाई
कम अवधि के बावजूद इस बार विधानसभा का मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने के संकेत हैं। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की पूरी रणनीति बना चुका है। ऐसे में 13 जुलाई से शुरू होने वाला यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

