असम में ‘राष्ट्रगान विवाद’ को लेकर बड़ा राजनीतिक बवाल खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि जिस कार्यक्रम में राष्ट्रगान के दौरान असम्मानजनक व्यवहार हुआ, उसमें देशद्रोह का मामला दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान भारत की अस्मिता का प्रतीक है, और उसका अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह मामला दरअसल एक कॉलेज में हुए कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां राष्ट्रगान के दौरान कुछ छात्रों और आयोजकों ने कथित तौर पर अनुशासन नहीं दिखाया। इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही सीएम सरमा ने कड़ा रुख अपनाया और पुलिस से सख्त कार्रवाई करने को कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा, “राष्ट्रगान का अपमान करना देश के सम्मान का अपमान है। इस तरह की हरकतें देशद्रोह के अंतर्गत आती हैं। मैंने डीजीपी को निर्देश दिया है कि इस मामले में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और जांच की जाए।”
वहीं, कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि भाजपा सरकार असहमति की हर आवाज को ‘देशद्रोह’ बताने की कोशिश कर रही है। असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोराह ने कहा, “देशद्रोह का मामला दर्ज करना लोकतंत्र का मजाक उड़ाने जैसा है। विरोध या असहमति दिखाने वालों को देशद्रोही कहना सरकार की तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है।”
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस तरह के मामलों में पहले तथ्यों की जांच जरूरी है, न कि सीधे देशद्रोह की धाराएं लगाना। वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि राष्ट्रगान का सम्मान हर भारतीय का कर्तव्य है।
असम पुलिस ने फिलहाल इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, संबंधित कॉलेज प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है और वीडियो की सत्यता की जांच के लिए तकनीकी टीम गठित की गई है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और भी राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।