मध्य प्रदेश : श्योपुर जिले के बरगवां थाना क्षेत्र में एक एम्बुलेंस को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि जिस वाहन का इस्तेमाल आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए होना चाहिए, उसका उपयोग कथित रूप से पेट्रोल और डीजल के परिवहन में किया जा रहा था। मामला सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
एम्बुलेंस होने का मिला कथित फायदा
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित एम्बुलेंस श्रीरामकृष्ण विवेकानंद सेवा कुटीर एनजीओ से जुड़ी है। उनका कहना है कि एम्बुलेंस होने के कारण वाहन को कई स्थानों पर बिना विशेष जांच के निकलने दिया जाता है। आरोप है कि इसी सुविधा का लाभ उठाकर उसमें ईंधन ले जाया जा रहा था। यदि जांच में यह बात सही साबित होती है तो यह नियमों के उल्लंघन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों के भरोसे पर भी गंभीर चोट होगी।
आपात स्थिति में मरीजों की सुरक्षा पर चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि एम्बुलेंस जैसी जीवनरक्षक सेवा का किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग बेहद चिंताजनक है। उनका तर्क है कि यदि इसी दौरान किसी गंभीर मरीज को तत्काल एम्बुलेंस की जरूरत पड़ जाए और वाहन दूसरे काम में लगा हो, तो स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। इसलिए पूरे मामले की विस्तृत जांच आवश्यक बताई जा रही है।
एनजीओ ने जांच का दिया भरोसा
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संबंधित एनजीओ के अधिकारियों ने कहा कि शिकायत की जानकारी मिलने के बाद इसकी जांच कराई जाएगी। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संबंधित वाहन किसकी निगरानी में संचालित हो रहा था और यदि उसमें ईंधन ले जाया गया तो इसकी अनुमति किस स्तर से दी गई थी।
कई सवालों के जवाब का इंतजार
घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं। क्या एम्बुलेंस का इस्तेमाल वास्तव में चिकित्सा सेवा के अलावा अन्य कार्यों में किया गया? यदि ऐसा हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी?
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि एम्बुलेंस के संचालन से जुड़े सभी रिकॉर्ड, जीपीएस डेटा, ड्यूटी रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल पूरा मामला आरोपों के आधार पर सामने आया है और संबंधित विभागों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच पर है। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे मामले में किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

