बिलासपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में आयोजित जनसुनवाई में महिलाओं से जुड़े 47 मामलों पर सुनवाई की गई। इस दौरान घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, दूसरी शादी, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल से जुड़े मामलों और पुलिस जांच में कथित लापरवाही जैसे प्रकरणों पर आयोग ने संबंधित पक्षों की बात सुनी और आवश्यक निर्देश जारी किए।
बेटियों के आरोपों पर पुलिस जांच का दायरा बढ़ाने के निर्देश
जनसुनवाई के दौरान एक मामला सबसे अधिक चर्चा में रहा, जिसमें दो बेटियों ने अपने पिता पर आरोप लगाया कि उन्होंने भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बचने के लिए उनकी मां को झूठे मामले में फंसाया। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को जांच का दायरा बढ़ाने और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए।
दवाइयों की सप्लाई चेन की भी होगी जांच
सुनवाई के दौरान आयोग ने जब्त दवाइयों से जुड़े दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि दवाइयों के बैच नंबर, खरीद, सप्लाई चेन और अन्य दस्तावेजों की दोबारा वैज्ञानिक एवं दस्तावेजी जांच की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि जब्त सामग्री का संबंधित मेडिकल स्टोर से कोई संबंध है या नहीं।
पीड़ित परिवार को कानूनी विकल्पों की दी जानकारी
महिला आयोग ने संबंधित बेटियों को सलाह दी कि वे भरण-पोषण से जुड़े पुराने मामले को परिवार न्यायालय में दोबारा प्रस्तुत कर सकती हैं। आयोग ने यह भी कहा कि यदि पहली पत्नी के रहते दूसरा विवाह किए जाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कानून के तहत उचित कार्रवाई की जा सकती है।
शिक्षकों के विवाद सहित कई मामलों का हुआ समाधान
जनसुनवाई के दौरान दो शिक्षकों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद में दोनों पक्षों को भविष्य में अनावश्यक शिकायतों से बचने और विभागीय स्तर पर समस्याओं का समाधान करने की सलाह दी गई। इसके अलावा कई पारिवारिक मामलों में आपसी सहमति बनने, समझौता होने अथवा वैवाहिक विवाद समाप्त होने के बाद प्रकरणों का निराकरण भी किया गया।
दूसरी शादी और भरण-पोषण के मामलों में भी दिए निर्देश
सुनवाई में दूसरी शादी, भरण-पोषण और सामाजिक समझौते से जुड़े मामलों पर भी आयोग ने आवश्यक कानूनी सलाह दी। एक मामले में महिला को उसका सामान सुरक्षित रूप से दिलाने और पूरी प्रक्रिया की फोटो एवं वीडियो रिकॉर्डिंग कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि महिलाओं को न्याय दिलाने और उनकी शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

