रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए पहली कक्षा में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु 6 वर्ष तय कर दी है। यह नई व्यवस्था आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के सभी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में लागू होगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित विभागों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
1 अप्रैल को आयु के आधार पर मिलेगा प्रवेश
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार किसी भी शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु का निर्धारण 1 अप्रैल की स्थिति के आधार पर किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों के प्रारंभिक शिक्षण स्तर को मजबूत करना और पूरे राज्य में प्रवेश प्रक्रिया को एक समान बनाना है।
जानिए किस कक्षा के लिए कितनी आयु तय की गई
नई व्यवस्था के तहत बालवाटिका-1 (नर्सरी) में प्रवेश के लिए आयु 3 वर्ष से अधिक और 4 वर्ष से कम होगी। बालवाटिका-2 (केजी-1) के लिए 4 वर्ष से अधिक और 5 वर्ष से कम, बालवाटिका-3 (केजी-2) के लिए 5 वर्ष से अधिक और 6 वर्ष से कम तथा पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की आयु 6 वर्ष से अधिक और 7 वर्ष से कम होना आवश्यक होगा।
बच्चों को मिलेगी तीन महीने तक की विशेष राहत
सरकार ने अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा में सीमित छूट भी दी है। यदि कोई बच्चा 1 अप्रैल तक निर्धारित आयु पूरी नहीं कर पाता, लेकिन 1 जुलाई तक उसकी आवश्यक आयु पूरी हो जाती है, तो उसे अधिकतम तीन महीने की विशेष छूट देकर संबंधित कक्षा में प्रवेश दिया जा सकेगा।
सरकारी और निजी सभी स्कूलों में लागू होंगे नियम
यह व्यवस्था राज्य के सभी शासकीय, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगी। साथ ही शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में आरक्षित 25 प्रतिशत सीटों पर होने वाले प्रवेश भी इसी नियम के अनुसार किए जाएंगे।
इन विद्यार्थियों पर लागू नहीं होगी नई आयु सीमा
यदि कोई छात्र किसी मान्यता प्राप्त विद्यालय की प्री-प्राइमरी कक्षा पूरी कर सीधे पहली कक्षा में प्रवेश ले रहा है, तो उस पर नई आयु सीमा लागू नहीं होगी। ऐसे मामलों में विद्यालय स्थानांतरण प्रमाण-पत्र, अंकसूची या स्कोर कार्ड में दर्ज जन्मतिथि के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा।
जिलों को दिए गए सख्त पालन के निर्देश
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, संकुल समन्वयकों और स्कूल प्रमुखों के माध्यम से इन नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही अभिभावकों तक नई व्यवस्था की जानकारी पहुंचाने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

