नई दिल्ली। ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद चाबहार पोर्ट एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बन गया है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इस बंदरगाह पर बढ़ते तनाव ने भारत की दीर्घकालिक व्यापार और कूटनीतिक योजनाओं को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर भारत की कई अहम परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
भारत की रणनीतिक नीति का अहम आधार है चाबहार
ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित चाबहार ईरान का पहला गहरे पानी वाला बंदरगाह है। भारत कई वर्षों से इसके विकास में साझेदार है और इस परियोजना में 120 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है। वर्ष 2016 में भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद इस परियोजना को नई गति मिली थी।
पाकिस्तान को दरकिनार कर मिलता है सीधा व्यापारिक मार्ग
चाबहार पोर्ट भारत को पाकिस्तान के रास्ते पर निर्भर हुए बिना अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और आगे यूरोपीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध कराता है। यही वजह है कि यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से भी जुड़ा हुआ है, जिससे माल परिवहन अधिक तेज और सुगम बनता है।
ग्वादर पोर्ट के मुकाबले भारत की मजबूत रणनीतिक मौजूदगी
विशेषज्ञों के अनुसार, चाबहार का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट में चीन की मजबूत भागीदारी के बीच चाबहार भारत के लिए रणनीतिक संतुलन बनाने का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सामरिक उपस्थिति को भी मजबूती देती है।
बढ़ते तनाव से परियोजना पर पड़ सकता है प्रभाव
मौजूदा हालात में चाबहार पोर्ट पर बढ़ा सैन्य तनाव भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। यदि क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचता है तो निवेश, व्यापारिक गतिविधियां और कनेक्टिविटी परियोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे भारत की मध्य एशिया तक पहुंच और INSTC जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की गति भी धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
भारत की नजर घटनाक्रम पर
हाल के महीनों में भारत और ईरान इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए लगातार संपर्क में थे। हालांकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बाद भविष्य की योजनाओं पर अनिश्चितता बढ़ गई है। ऐसे में नई दिल्ली पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है और आगे की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय कर सकती है।

