नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम आपूर्ति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इस समझौते को भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
परमाणु ऊर्जा के लिए मिलेगा महत्वपूर्ण ईंधन
समझौते के बाद भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग खुल जाएगा। यूरेनियम परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के संचालन के लिए आवश्यक प्रमुख ईंधन है और इसके जरिए भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी गति दे सकेगा।
ऑस्ट्रेलिया के पास हैं बड़े यूरेनियम भंडार
ऑस्ट्रेलिया दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम संसाधनों वाले देशों में शामिल है। हालांकि, कानूनी प्रावधानों और राजनीतिक कारणों की वजह से अब तक भारत को वहां से यूरेनियम निर्यात सीमित रहा था। नए समझौते के बाद दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग और मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा
समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। उनके अनुसार, इससे भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा। साथ ही, परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ने से भारत को कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी।

