BHU Fined: देश की प्रतिष्ठित केंद्रीय शिक्षण संस्थाओं में शामिल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह विश्वविद्यालय से 2.65 करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरण मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करे।
33 पेड़ों की कटाई के बाद शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई के आरोपों से हुई थी। याचिकाकर्ता और अधिवक्ता सौरभ तिवारी के अनुसार, छात्रों के विरोध के बाद एनजीटी की ओर से गठित संयुक्त समिति ने जांच की, जिसमें 33 पेड़ों की कटाई की पुष्टि हुई। इनमें आम, गुलमोहर सहित सात चंदन के पेड़ भी शामिल बताए गए।
एनजीटी के पहले आदेश का नहीं हुआ पालन
11 अगस्त 2025 को ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया था कि पर्यावरण मुआवजे की राशि निर्धारित कर तीन महीने के भीतर विश्वविद्यालय से उसकी वसूली सुनिश्चित की जाए। हालांकि निर्धारित अवधि में कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने आदेश के पालन के लिए निष्पादन याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ट्रिब्यूनल को बताया कि विश्वविद्यालय पर 2,65,06,877.08 रुपये का पर्यावरण मुआवजा निर्धारित किया जा चुका है।
तीन महीने में पूरी करनी होगी वसूली
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अब स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्धारित पर्यावरण मुआवजे की पूरी राशि तीन महीने के भीतर विश्वविद्यालय से वसूल की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि राशि का भुगतान तय समय सीमा में हो।
विश्वविद्यालय ने रखा अपना पक्ष
विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि कुछ पेड़ों की कटाई चोरी की घटना से जुड़ी थी। हालांकि संयुक्त समिति ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिसर में मौजूद सुरक्षा प्रबंधों के बावजूद ऐसी घटना कैसे संभव हुई, इसकी भी जांच जरूरी है।
978 पौधे लगाकर की भरपाई की कोशिश
पेड़ों की कटाई के बाद विश्वविद्यालय ने क्षतिपूर्ति के तौर पर 978 पौधे लगाने का अभियान शुरू किया था। इसके बावजूद ट्रिब्यूनल ने माना कि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई के लिए केवल पौधारोपण पर्याप्त नहीं है। इसी आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरण मुआवजा तय करने और उसकी वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

