आज 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो रही है। इस अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र अपने विग्रह स्वरूप में श्रीमंदिर से निकलकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे। यह हिंदू परंपरा का ऐसा अद्भुत पर्व है, जब भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच पहुंचते हैं। पुरी में यह महोत्सव 10 दिनों तक मनाया जाएगा।
आज से शुरू हुई पवित्र रथ यात्रा
धार्मिक मान्यता के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली जाती है। इस वर्ष उदयातिथि के आधार पर 16 जुलाई को रथ यात्रा का आयोजन हो रहा है। इस दौरान भगवान अपनी मौसी के घर माने जाने वाले गुंडिचा मंदिर में विराजमान होते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इस स्थान को भगवान जगन्नाथ का जन्मस्थल भी माना जाता है।
घर पर इस समय करें भगवान की पूजा
यदि आप पुरी नहीं जा सकते तो घर पर भी पूरे विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ की पूजा कर सकते हैं।
पूजा के लिए शुभ समय
- सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है।
चौघड़िया के प्रमुख शुभ मुहूर्त
दिन में
- शुभ समय: सुबह 5:34 बजे से 7:17 बजे तक
- लाभ काल: दोपहर 12:27 बजे से 2:10 बजे तक
- शुभ काल: शाम 5:37 बजे से 7:21 बजे तक
रात्रि में
- शुभ समय: शाम 7:21 बजे से रात 8:37 बजे तक
- लाभ काल: 17 जुलाई को रात 12:27 बजे से 1:44 बजे तक
- शुभ काल: 17 जुलाई को रात 3:01 बजे से सुबह 4:17 बजे तक
इस विधि से करें भगवान जगन्नाथ की पूजा
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान की सफाई कर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गंगाजल छिड़ककर चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद पीले पुष्प, मोगरा और तुलसी अर्पित करें। देसी घी का दीपक और धूप जलाकर भगवान की आराधना करें। अंत में आरती करें, परिवार के सभी सदस्यों को आरती दें और प्रसाद वितरित करें। इस दिन भगवान के भजन और संकीर्तन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
भगवान को यह भोग जरूर लगाएं
रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ को तुलसी अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा नारियल, केला, पंचामृत, खाजा, खीर, काकरा पीठा, खिचड़ी, मालपुआ और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं। पुरी की परंपरा के अनुसार भगवान को ‘कनिका’ नामक मीठा चावल भी चढ़ाया जाता है, जिसे घी, चीनी, काजू, किशमिश, दालचीनी और चावल से तैयार किया जाता है। वहीं भगवान बलभद्र को पोड़ा पीठा का भोग अर्पित करने की परंपरा है।
रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि रथ यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों को दर्शन देने स्वयं मंदिर से बाहर आते हैं। श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा, भजन और सेवा करने से सुख, समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। इस दिन सात्विक भाव से की गई आराधना विशेष पुण्यदायी मानी जाती है।

