भगवान जगन्नाथ की पावन रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू हो रही है। इस शुभ अवसर पर महाप्रभु जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करते हैं। इस दिन देशभर के श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ भगवान को प्रिय भोग अर्पित करते हैं। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में मालपुआ का विशेष महत्व माना जाता है।
अगर आप भी रथ यात्रा के अवसर पर घर में भगवान जगन्नाथ के लिए स्वादिष्ट और मुलायम मालपुए बनाना चाहते हैं, तो यह आसान विधि आपके काम आ सकती है।
मालपुआ बनाने के लिए जरूरी सामग्री
- 1 कप मैदा
- ½ कप सूजी
- ½ कप चीनी
- 2 से 3 बड़े चम्मच सूखा कद्दूकस किया नारियल
- ½ चम्मच सौंफ
- ½ चम्मच इलायची पाउडर
- गुनगुना दूध आवश्यकता अनुसार
- एक चुटकी बेकिंग सोडा
- कुछ केसर के रेशे (वैकल्पिक)
- तलने के लिए देसी घी या तेल
ऐसे तैयार करें परफेक्ट घोल
सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा, सूजी और चीनी डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें सूखा नारियल, सौंफ और इलायची पाउडर मिलाएं।
अब गुनगुने दूध में केसर डालकर कुछ मिनट के लिए छोड़ दें। फिर इस दूध को सूखे मिश्रण में डालते हुए धीरे-धीरे मिलाएं और जरूरत अनुसार दूध डालकर गाढ़ा लेकिन स्मूद घोल तैयार करें।
सबसे आखिर में एक चुटकी बेकिंग सोडा मिलाएं। यही छोटा सा तरीका मालपुओं को फूला हुआ और हल्का जालीदार बनाने में मदद करता है।
घोल तैयार होने के बाद इसे ढककर लगभग एक घंटे के लिए रख दें, ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए और स्वाद भी बेहतर हो जाए।
मालपुए तलने की सही विधि
कड़ाही में देसी घी या तेल गर्म करें। जब घी मध्यम गर्म हो जाए तो करछी की मदद से थोड़ा-थोड़ा घोल डालें।
धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। तैयार मालपुओं को निकालकर अतिरिक्त घी निकलने दें। चाहें तो इन्हें हल्की चाशनी में कुछ सेकंड डुबोकर भी परोस सकते हैं।
भोग के लिए रखें इन बातों का ध्यान
रथ यात्रा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ को भोग बनाते समय शुद्ध सामग्री का उपयोग करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार भोग में प्याज और लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता। साफ-सफाई और श्रद्धा के साथ तैयार किया गया प्रसाद विशेष शुभ माना जाता है।
स्वाद और परंपरा का सुंदर संगम
घर में बने मुलायम, खुशबूदार और हल्के जालीदार मालपुए रथ यात्रा के पर्व को और भी खास बना सकते हैं। भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित करने के बाद इसे परिवार और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में बांटकर इस पावन अवसर की खुशी साझा की जा सकती है।

