रांची। झारखंड में जेएसएससी-सीजीएल सहित टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित 14 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के फैसले को आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने छात्रों के संघर्ष की पहली बड़ी सफलता बताया है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह आंदोलन का अंत नहीं है और भर्ती तथा परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होने तक छात्रों की लड़ाई जारी रहेगी।
मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि जिन भर्ती परीक्षाओं को लेकर गड़बड़ी और धांधली के आरोप उठे थे, उनका रद्द होना लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन का परिणाम है। उनके अनुसार, आंदोलन का उद्देश्य केवल कुछ परीक्षाओं को निरस्त कराना नहीं, बल्कि झारखंड की पूरी भर्ती प्रणाली को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है।
अब केवल परीक्षा रद्द करना नहीं, पूरी व्यवस्था बदलने की मांग
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार को भविष्य के लिए ऐसी मजबूत परीक्षा प्रणाली तैयार करनी होगी, जिसमें पेपर लीक, प्रश्नपत्र में हेरफेर या किसी भी स्तर पर धांधली की संभावना खत्म हो सके।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा की प्रक्रिया के हर चरण का नियमित ऑडिट कराया जाए। परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से लेकर संबंधित अधिकारियों तक सभी की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए, ताकि किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
2 जुलाई से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे बन गया बड़ा अभियान
छात्रों का आंदोलन 2 जुलाई से शुरू हुआ था, जिसने समय के साथ व्यापक रूप ले लिया। 25 जुलाई को मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से सत्याग्रह शुरू किया गया। इसके बाद जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया।
मामले को लेकर छात्रों ने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की थी। आंदोलन के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और पूरी व्यवस्था में सुधार की मांग को लगातार उठाया।
आने वाली पीढ़ी के लिए भी व्यवस्था सुधारने का लक्ष्य
देवेंद्र नाथ महतो का कहना है कि यह संघर्ष केवल वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन का उद्देश्य ऐसी विश्वसनीय व्यवस्था स्थापित कराना है, जिससे भविष्य में युवाओं को अपने अधिकार और निष्पक्ष परीक्षा के लिए सड़कों पर उतरने की जरूरत न पड़े।
उन्होंने ईमानदारी से परीक्षा देने वाले और लंबे समय से तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। महतो ने कहा कि 14 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला निश्चित रूप से आंदोलन की पहली सफलता है, लेकिन अब छात्रों का अगला लक्ष्य भर्ती और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार तथा भविष्य की सभी परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित कराना होगा।

