नई दिल्ली। राजधानी में करोड़ों रुपये के प्रॉपर्टी लोन घोटाले का खुलासा करते हुए दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने मुख्य आरोपी मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित उसके कार्यालय से हिरासत में लिया गया। पुलिस का आरोप है कि उसने जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का सहारा लेकर करीब 3 करोड़ रुपये का हाउसिंग लोन हासिल करने की साजिश रची थी।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
इस मामले की जांच प्रोटियम फाइनेंस लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि लवलीन मनचंदा की शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में बताया गया कि आनंद विहार के डी-ब्लॉक स्थित एक संपत्ति के नाम पर धोखाधड़ी कर करोड़ों रुपये का लोन लिया गया। शुरुआती जांच में ही कई दस्तावेज संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद आर्थिक अपराध शाखा ने गहन जांच शुरू की।
मृत महिला को बनाया संपत्ति का मालिक
जांच के दौरान पता चला कि 9 नवंबर 2022 को तैयार की गई सेल डीड फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनाई गई थी। इसमें एक ऐसी महिला को संपत्ति का मालिक बताया गया था, जिसका पहले ही निधन हो चुका था। इसी आधार पर संपत्ति का सौदा दिखाकर आगे की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।
25 दिनों में दो बार तैयार हुई बिक्री विलेख
ईओडब्ल्यू के अनुसार, उसी संपत्ति की महज 25 दिनों के भीतर दो अलग-अलग बिक्री विलेख तैयार किए गए। इन दस्तावेजों का उपयोग विभिन्न वित्तीय संस्थानों से लोन स्वीकृत कराने के लिए किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी और इसे सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
फर्जी पहचान और कंपनियों का सहारा
पुलिस का कहना है कि मनीष कुमार ने खुद को संपत्ति का वैध खरीदार बताते हुए पूरे फर्जीवाड़े को संचालित किया। लोन की राशि हासिल करने के बाद उसे विभिन्न फर्जी कंपनियों और फर्मों के माध्यम से इधर-उधर किया गया, ताकि लेनदेन पर संदेह न हो।
लोन आवेदन में भी किया बड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने लोन दस्तावेजों में एक अन्य मृत महिला को अपनी पत्नी और सह आवेदक के रूप में दर्ज कराया था, जबकि उसकी वास्तविक पत्नी कोई और है। पुलिस के अनुसार, इस तरह की गलत जानकारी देकर पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने का प्रयास किया गया।
छापेमारी में मिले कई अहम दस्तावेज
पुलिस ने बताया कि मनीष कुमार एम/एस ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी का संचालक है। उसने एम/एस ग्लोबल फाइनेंस लिमिटेड और एम/एस बांके बिहारी एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों का इस्तेमाल कर जाली कागजात के आधार पर करीब 3 करोड़ रुपये का लोन हासिल किया। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, पीओएस मशीनें और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
लोगों और बैंकों को दी गई विशेष सलाह
ईओडब्ल्यू ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी संपत्तियों की नियमित निगरानी करें और लंबे समय तक उन्हें बिना देखरेख के न छोड़ें। साथ ही बैंक और वित्तीय संस्थानों को सलाह दी गई है कि किसी भी संपत्ति के विरुद्ध लोन स्वीकृत करने से पहले स्वामित्व, दस्तावेजों और रिकॉर्ड का गहन सत्यापन करें, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

